हसला ने जल्द से जल्द मैन्युअल मार्किंग शुरू करने की रखी मांग
चंडीगढ़। प्रदेश में इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं-12वीं कक्षा के विद्यार्थियों का परिणाम देरी से जारी होने की आशंका है। बोर्ड इस बार डिजिटल मार्किंग की तैयारी में है, लेकिन अभी तक अध्यापकों को इसका प्रशिक्षण तक नहीं दिलाया गया है। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) ने बोर्ड की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मैनुअली ही मार्किंग कराने की मांग उठाई है। हसला का कहना है कि डिजिटल मार्किंग में समय अधिक लगेगा, जिससे बच्चों के आगामी कक्षाओं में दाखिला लेने पर असर पड़ेगा और बोर्ड की करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होगी। इस संबंध में हसला राज्य प्रधान सतपाल सिंधू ने बोर्ड चेयरमैन को पत्र लिखा है।
अनुमान है कि इस बार 10वीं-12वीं में करीब पांच लाख बच्चों ने परीक्षा दी है। ऐसे में विषय अनुसार कुल बच्चों की कापियां की संख्या करीब 35 लाख बनती है। हसला ने कहा कि बोर्ड चेयरमैन वीपी यादव ने दावा किया था कि मार्च के पहले सप्ताह में अध्यापकों को डिजिटल मार्किंग का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, लेकिन इसमें लगातार देरी हो रही है।
हसला सदस्यों ने डिजिटल मार्किंग के तकनीकी और वित्तीय पहलु के साथ-साथ अन्य पहलुओं पर चिंता जाहिर की है और अवगत करवाया कि बोर्ड ने निविदा सूचना में बयाना राशि जमा (ईएमडी) के तौर पर 10 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की है। इससे यह साबित होता है कि इस कार्य के लिए इससे भी अधिक राशि खर्च होगी, जबकि मैनुअली तौर पर मार्किंग में हर साल सात से आठ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने कहा कि अब से पहले भारत के सबसे बड़े बोर्ड सीबीएसई ने 2014 व बिहार बोर्ड ने 2017 में डिजिटल मार्किंग करवाने का प्रयास किया था, लेकिन वह प्रयास भविष्य में सफल नहीं हो पाया था।
राज्य महासचिव अमित मनहर और प्रेस सचिव अजीत चंदेल ने कहा कि डिजिटल मार्किंग करवाने के लिए बोर्ड की ओर से नवंबर में छोटे स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट अमल में लाया गया तो उसमें तरह-तरह की समस्याएं सामने आई थी। फरवरी में बोर्ड चेयरमैन के साथ हुई बैठक में भी अवगत करवाया था। सामान्यतः बोर्ड परीक्षाओं के शुरू होने के एक सप्ताह में ही मार्किंग का कार्य शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार देरी हो रही है।