मैं उनसे अमेरिका में मिला और उन्होंने मुझे बताया कि मैंने मानवता के लिए अपना काम किया है। उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने मुझे अपना काम करने के लिए कहा और पुरस्कारों की कभी परवाह नहीं की। जब मुझे दो फीसदी वैश्विक वैज्ञानिकों में सूचीबद्ध होने का पुरस्कार मिला तो मैंने उन्हें बड़ी श्रद्धा के साथ याद किया। उन्होंने सिख धर्म का भी खूब प्रचार किया। -प्रो. स्वर्णजीत सिंह, इमटेक, चंडीगढ़।
कंप्यूटर से लेकर मोबाइल तक उन्हीं के कारण दौड़ रहे
प्रो. नरिंदर सिंह दुनिया के शीर्ष दस वैज्ञानिकों में शामिल रहे। फाइबर ऑप्टिक्स का आविष्कार करके उन्होंने दुनिया में क्रांति ला दी। आज कंप्यूटर से लेकर मेल, टेलीफोन आदि फाइबर के कारण चल रहे हैं। उनके कार्यों को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। उन्होंने कई फाउंडेशन संचालित करके विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप आदि प्रदान की। - प्रो. भूपिंदर सिंह भूप, फार्मास्यूटिकल विभाग, पीयू।
पीयू ने दिया था विज्ञान रत्न पुरस्कार
अप्रैल 2016 में उनसे अमेरिका में एक कार्यक्रम में मुलाकात हुई। वह मुख्य अतिथि थे। उस दौरान उनकी आयु 90 साल की रही थी और खुद गाड़ी चलाकर पहुंचे थे। वह फिट थे। दुनिया के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में एक थे। उनके घर भी मैं गया। पीयू ने उन्हें दीक्षांत समारोह में विज्ञान रत्न सम्मान से नवाजा। हालांकि वह यहां पहुंच नहीं पाए थे। उनका जाना पूरी दुनिया को खलेगा। -प्रो. रोनकी राम, डीन आर्टस, पीयू।
पीयू ने मानद स्कॉलर उपाधि के लिए बुलाया था
पीयू की ओर से प्रो. नरिंदर को मानद स्कॉलर के रूप में उपाधि के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन तबीयत उनकी खराब होने के कारण नहीं आ पाए। दो बार फोन पर मैंने उनसे बात की। उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स पर काम करके पूरी दुनिया को नया रास्ता दिखाया। बड़े वैज्ञानिकों में से एक थे। उनके कार्यों को हमेशा याद किया जाता रहेगा। उन्होंने मानवता के लिए बड़ा काम किया। - प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू।