तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में खड़े हुए किसान आंदोलन के बड़े किसान नेता पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी पिच पर आउट हो गए। सूबे की 22 किसान जत्थेबंदियों के प्रमुख चेहरे बलबीर सिंह राजेवाल चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। वहीं, दिल्ली हिंसा के दौरान चर्चा में आए लक्खा सिधाना भी कुछ कमाल नहीं कर पाए। उन्हें आम आदमी पार्टी के सुखबीर सिंह ने करारी शिकस्त दे दी।
कृषि कानूनों की वापसी की सफलता के बाद पहली बार पंजाब में किसान सियासी मैदान में दिखाई दिए। सूबे के होने वाले विधानसभा चुनाव में 22 किसान जत्थेबंदियों ने चुनाव लड़ने के लिए संयुक्त समाज मोर्चा का गठन कर चुनावी ताल ठोकी थी। जत्थेबंदियों ने किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल को प्रमुख चेहरा बनाया था। राजेवाल ने समराला से चुनाव लड़ा। उनके चुनाव मैदान में होने से समराला सीट को हॉट माना जा रहा था, लेकिन वह जीत नहीं पाए। उन्हें मात्र 4676 मत ही प्राप्त हुए। समराला विधानसभा के कुल वोट में से मात्र 3.05 वोट प्रतिशत मत ही प्राप्त हुए, जिससे उनकी जमानत भी जब्त हो गई।
इस सीट से आप के जगतार सिंह दयालपुरा ने 57557 वोट हासिल कर जीत हासिल की है। वहीं, किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली हिंसा के प्रमुख आरोपी और पूर्व गैंगस्टर लक्खा सिधाना भी कुछ खास नहीं कर पाए। मौड़ मंडी से सिधाना ने चुनाव लड़ा। उन्हें आम आदमी पार्टी के सुखबीर सिंह ने 35008 वोटों से करारी शिकस्त दी। सुखबीर को 63099 वोट और सिधाना को 28091 वोट मिले। किसानों के अन्य प्रत्याशी भी कुछ खास नहीं कर पाए और उन्हें चुनाव की सियासी पिच से आप के अधिकांश प्रत्याशियों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।