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हरियाणाः कृषि मंत्री के सामने किसानों ने उड़ाई सरकारी योजनाओं की धज्जियां, गिनाई कई खामियां

Tue, 11 Dec 2018 09:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीएम मनोहर लाल और मंत्री ओपी धनखड़
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किसानों की आय दोगुनी करने में जुटी सरकार को सोमवार को किसानों ने ही जमीनी हकीकत का आइना दिखा दिया। सोमवार को यहां टॉप 100 कृषि गोष्ठी का आयोजन सरकार ने किसानों से सुझाव लेने के लिए किया। कृषि मंत्री ओपी धनखड़, अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि नवराज संधू और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की चेयरमैन कृष्णा गहलावत किसानों से सुझाव लेने और समस्याएं जानने के लिए खुद मौजूद थे।

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 पहले सत्र की शुरूआत होने के बाद जैसे ही प्रगतिशील किसानों और किसान नेताओं की बारी आई, उन्होंने कृषि क्षेत्र की योजनाओं का कच्चा चिट्ठा खोलकर सामने रख दिया। एक के बाद एक अनेक किसान नेताओं ने जहां योजनाओं की खामियां गिनाईं, वहीं अफसरों और नेताओं पर कृषि को कम महत्व देने का आरोप भी लगा डाले। इस बीच लाडवा से भाजपा के विधायक पवन सैनी भी किसानों के समर्थन में मैदान में उतर आए। 

उन्होंने सरकार की योजनाओं पर सवाल खड़े किए। इस दौरान कृषि, पशु और बागवानी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भी सरकार को योजनाओं और सिस्टम में अनेक सुधार करने की सलाह दी। हालांकि, विभागीय अधिकारी इस दौरान अपनी योजनाओं का बखान करने से भी नहीं चूके। किसानों के योजनाओं की खामियां कड़े रुख में उठाने पर कृषि मंत्री ओपी धनखड़ को अनेक बार बीच में बोलना पड़ा। उन्होंने किसानों को समझाते हुए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

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 दूसरे सत्र में गोष्ठी का समापन करने सीएम मनोहर लाल पहुंचे। उनकी मौजूदगी में भी किसान नेताओं ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खूब कटाक्ष किए। जिस पर सीएम ने कृषि और बागवानी विभाग से प्रगतिशील किसानों के चयन की प्रक्रिया और मापदंड ही पूछ डाले। इस पर कृषि विभाग के अधिकारियों को पहले तो जवाब देते नहीं बना, जब किसानों व नेताओं ने कहा कि वे पंजीकृत हैं और कृषि उपनिदेशकों के जरिए अपने नाम भेजते हैं, तो विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी प्रगतिशील किसानों के चयन का कोई पैमाना न होने की बात स्वीकार ली।

अफसर एसी रूम में बैठकर नहीं बना सकते किसानों की योजनाएं : सुरेंद्र सिंह
भारतीय किसान संघ के प्रदेश संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह ने सीएम के सामने कहा कि एसी रूम में बैठकर अधिकारी किसानों के कल्याण की योजनाएं नहीं बना सकते। उन्हें जमीनी हकीकत समझनी होगी। कृषि वैज्ञानिक व अधिकारी एक-एक गांव गोद लें और उसे योजनाओं अनुसार आदर्श बनाएं। योजनाएं बेहतर साबित हो सकती हैं, लेकिन क्रियान्वयन में अधिकारी रोड़ा बने हुए हैं। लाभ न मिलने पर किसान परेशान होकर सरकार को कोस रहा है।

किसान सुरेंद्र सिंह, करनाल
. फसल बीमा करने वाली कंपनी दो प्रतिशत प्रीमियम किसान के बैंक खाते से काट लेती है। बाकी प्रीमियम सरकार देती है। कंपनियों का कोई काम नहीं है। गेहूं अप्रैल में कटता है और बीमा कंपनियों की समयावधि मार्च में खत्म हो जाती है। गेहूं कटाई के समय बारिश हो जाए तो किसान मारा जाता है, चूंकि बीमा करने वाली कंपनी अपना समय पूरा कर जा चुकी होती है और नई कंपनी बीमा देती नहीं। इसलिए बीमा कंपनी के साथ अनुबंध कम से कम दो फसलों के लिए होना चाहिए।

. फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 170 रुपये बढ़ता है तो खरीद एजेंसियां सौ रुपये नमी और थोथापन के नाम पर काट लेती हैं। जबकि, इसका कट बीस-तीस रुपये से अधिक नहीं बनता। इससे किसानों को समर्थन मूल्य बढ़ने का लाभ नहीं मिल पाता।

.फसल खरीद के समय सरकारी कंडा मंडी के गेट पर लगे। वहीं किसान को कुल वजन की स्लिप मिले। पेमेंट खाते में हो ताकि आढ़ती मनमाने तरीके से नमी और थोथापन के नाम पर कटौती न कर सकें।

. डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सिस्टम ऑनलाइन हो। शेड बनाने के नाम पर दो लाख रुपये तक का सामान खरीदने की बाध्यता खत्म की जाए। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत होती है। 

किसान धर्मबीर डागर, कुरुक्षेत्र
. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों का दो साल से मुआवजा लंबित पड़ा है। सीएम विंडो पर भी अनेक शिकायतें हैं। जिला प्रशासन व कृषि विभाग के अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। निजी कंपनियां किसानों से मोटा फायदा कमा रही हैं।

पशुधन के नस्ल सुधार की प्रक्रिया बेहद धीमी : पवन सैनी
प्रदेश में पशुधन के नस्ल सुधार की प्रक्रिया बेहद धीमी है। दूध का निर्यात करने में इसलिए दिक्कत आ रही है, चूंकि दूध संक्रमित पाया जाता है। इसलिए पशुधन का नियमित टीकाकरण हो। टमाटरों को बर्बाद होने से बचाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाई जाएं। इस दिशा में काम नहीं हो रहा। फव्वारा सिंचाई योजना की सब्सिडी नहीं मिल रही। किसानों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

कृषि विभाग को महत्वहीन मानते हैं नेता-अधिकारी : रामकुमार
प्रगतिशील किसान रामकुमार ने कहा कि नेता और अधिकारी कृषि विभाग को महत्वहीन मानते हैं। कृषि वर्कशॉप हो ही नहीं रही। जिलों में कृषि विकास अधिकारी नहीं हैं। जीटी रोड बेल्ट पर कीटनाशकों की बेतहाशा यूनिट कुछ समय में खुली हैं। पैसे लेकर सैंपल पास-फेल करने का काम चल रहा है। बायो-फर्टिलाइजर के नाम पर चल रहा गोरखधंधा भी सरकार बंद करे।
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सरकार की आयात नीति से किसानों को भारी नुकसान : चढ़ूनी

भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने गोष्ठी में सरकार की आयात नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खाद्यान्नों के अंधाधुंध आयात से किसानों पर आर्थिक मार पड़ रही है। गेहूं बाहर से आयात किए जाने पर किसानों को एमएसपी 1700 रुपये से अधिक होने पर मात्र हजार रुपये प्रति क्विंटल मूल्य ही मिला। आयात उसी वस्तु का हो, जिसकी जरूरत है। एमएसपी से कम खरीद करने वाले आढ़तियों पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए। सरकार कड़ा कानून बनाए।

मधुमक्खी पालन से होने वाली आय कृषि में जोड़ें : विनय
अतुल्य बी मास्टर प्रोड्यूसर कंपनी के प्रमोटर विनय फौगाट ने कहा कि मधुमक्खी पालन से किसानों को होने वाली आय कृषि में जोड़ी जाए। उस पर कोई आयकर न लगे। मधुमक्खी पालकों को आर्थिक संरक्षण भी सरकार प्रदान करे।

प्रगतिशील किसानों के चयन के बनाएं मापदंड : सीएम
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि कृषि विभाग प्रगतिशील किसानों के चयन के लिए मापदंड बनाए। किसानों के बीच प्रतियोगिता कराकर प्रगतिशील किसान चुनें। चयन के बाद उन्हें सम्मान और प्रोत्साहन दें। किसानों की आय दोगुना करना जटिल विषय है। इसे किसान, विशेषज्ञ और सरकार मिलकर ही कर सकते हैं।

संसाधानों और समयानुसार करेंगे कार्यों में सुधार : धनखड़
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा कि किसानों ने जो भी मुद्दे उठाए हैं। उनके अध्ययन के बाद विभागों के कार्यों में सुधार और नई पहल संसाधनों और समयानुसार की जाएगी। फसल बीमा योजना में निजी कंपनियों को प्रीमियम का तीन गुणा मुआवजा भी देना पड़ा है। किसान विपक्ष के बहकावे में न आए। 
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