किसान यूनियन के साथ पंजाब सरकार की बैठक बुधवार को भी विफल रही। किसानों ने फिर पंजाब सरकार को निजी थर्मल पावर प्लांट के रेलवे ट्रैक खाली नहीं करने को कहा है। किसान भवन में हुई बैठक में मंत्रियों से वार्ता के बाद किसान संगठनों ने गुरुवार को होने वाले देशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई।
सरकार के मंत्री सुखबिंदर सिंह रंधावा और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के राजनीतिक सलाहकार कैप्टन संदीप संधू से वार्ता के बाद भाकियू उगराहां के प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां ने बताया कि हमारी बैठक बेनतीजा रही। बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि वह निजी थर्मल प्लांटों के रेल ट्रैक से नहीं उठेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार अपने सरकारी थर्मल प्लांटों को चलाएं, उसमें हम किसी भी तरह की अड़चन पैदा नहीं कर रहे और जिस तरह से केंद्र सरकार का रवैया रहा है, उसमें स्पष्ट होता है कि वह जानबूझकर मालगाड़ियों को नहीं भेज रही है। हमारे उठने की बात को लेकर सरकार बार-बार दबाव बना रही है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि हम निजी थर्मल प्लांटों के साफ तौर पर खिलाफ हैं और आगे भी रहेंगे।
सरकार की सख्ती को भी झेलने को तैयार
जोगिंदर सिंह ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हम बाकी किसान संगठनों के फैसले के साथ हैं। हम भले ही 30 किसान संगठन साथ में नहीं है लेकिन हम एक दूसरे-के फैसले को मानते हैं। इससे पहले हमारे निर्णयों में बाकी किसान संगठन भी साथ रहे। उन्होंने यह भी एलान किया कि अगर सरकार आने वाले समय में हमारे ऊपर शक्ति करेगी तो हम उसे भी झेलने को तैयार है लेकिन अपनी बात से पीछे नहीं हटेंगे।
चक्का जाम की पूरी तैयारी
जोगिंदर सिंह ने कहा कि गुरुवार को हमारा संगठन चक्का जाम करेगा। किसान जगह-जगह पर धरना प्रदर्शन करेंगे। वहीं 26 और 27 नवंबर को को हम दिल्ली जाएंगे और किसान हितैषी हर फैसले में सभी किसान संगठन एक मत हैं।