केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में किसानों का आंदोलन जारी है। अमृतसर में जंडियाला, पटियाला में राजपुरा, बठिंडा में तलवंडी साबो में किसान रेल ट्रैक पर बैठे हैं, जबकि फिरोजपुर में रेलवे स्टेशन पर धरना दे रहे हैं। इसके अलावा राज्य में 20 से अधिक जगह पर उन्होंने कॉरपोरेट घरानों के मॉल और पेट्रोल पर धरना जारी रखा है।
किसान संगठन के नेताओं ने कहा है कि जब तक केंद्र सरकार किसान विरोधी कानून को वापस नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उधर, मंगलवार को दिल्ली में 22 राज्यों की 250 किसान जत्थेबंदियों ने बैठक कर फैसला लिया कि वे पांच नवंबर को देशव्यापी चक्का जाम और 26-27 नवंबर को दिल्ली का घेराव करेंगे।
पंजाब सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करने में लगी: पंधेर
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब के गांवों में 12 घंटे बिजली सप्लाई बंद कर कैप्टन सरकार किसानों के आंदोलन को बदनाम करने में लगी है। वहीं केंद्र सरकार ने किसानों को रोकने के लिए पराली संबंधी नया कानून लाने का फैसला किया है। पंधेर ने कहा कि केंद्र सरकार को पंजाब और कश्मीर के लोग आगामी समय में जवाब देंगे।
‘जलालाबाद में धान की खरीद शुरू नहीं हुई तो नहीं आने देंगे बाहरी धान’
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की ओर से माहमूजोइया टोल प्लाजा सहित कारपारेट घरानों के मॉल और पेट्रोल पंप का घेराव 28वें दिन भी जारी रहा। टोल प्लाजा से वाहन बिना टोल दिए गुजर रहे हैं। किसानों ने कहा कि शैलर मालिकों ने जलालाबाद में धान की खरीद बंद कर दी है। सरकारी एजेंसियां भी फसल नहीं खरीद रही हैं।
किसान संगठनों ने कहा कि अगर जलालाबाद में खरीद शुरू न की गई तो किसान बाहर की मंडियों से जलालाबाद में धान का एक भी दाना नहीं आने देंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन व मार्केट कमेटी की होगी। इस मौके पर धरने में जिला प्रधान गुरविंदर सिंह मन्नेवाला, उपाध्यक्ष सतपाल सिंह भोडीपुर, सावन सिंह ढाबां, परमजीत घागां, शेर सिंह चक्क सैदोके, जोगा सिंह भोडीपुर, बलदेव बट्टी, पाला बाई, कश्मीर लाल माहमूजोइया, बिशंबर सिंह बिल्लीमार, काबल सिंह घागां, भीम सैन, प्रेम कुमार मौजूद रहे।