मांगों को लेकर दिल्ली मोर्चा फतेह करने के लिए किसान पूरी तरह से तैयार हैं। छह महीने का राशन, 50 पानी के टैंकर और करीब 1500 ट्रैक्टर-ट्रालियों व 500 अन्य वाहनों के साथ किसान दिल्ली के लिए कूच कर गए हैं। हालांकि फिलहाल किसान पंजाब-हरियाणा के विभिन्न बार्डरों पर फंसे हैं, लेकिन वह पुलिस प्रशासन के लगातार रोकने के बावजूद आगे बढ़ने पर अड़े हैं।
किसानों ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रालियों पर ही तिरपालें लगाकर इनमें ठहरने का भी प्रबंध किया हुआ है। इसलिए किसानों का कहना है कि अगर कुछ दिन बार्डरों पर भी रूकना पड़े, तो कोई दिक्कत नहीं होगी। छह महीने के राशन में किसानों के पास चीनी से लेकर चायपत्ती, मसालें, चावल, आटा, सभी प्रकार की दालें, आलू, प्याज हैं। यहां तक कि कुछ दिनों के लिए सब्जियों का स्टाक भी किसानों ने अपनी ट्रालियों में रखा है। इसके साथ ही खाना बनाने, नहाने व शौचालय जाने के लिए 50 पानी के टैंकर भी किसानों के काफिले में शामिल हैं। ट्रालियों में डीजल व अन्य जरूरी सामान भी स्टाक किया हुआ है। फतेहगढ़ साहिब से गई 100 ट्रैक्टरों के पीछे डबल ट्रॉलियां जोड़ीं गई हैं।
अमर उजाला से बातचीत में भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के प्रधान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि किसान जत्थेबंदियों के मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करने के फैसला लेने के बाद से ही गांव-गांव जाकर राशन व फंड इकट्ठा किया जा रहा था। इस दौरान जत्थेबंदियों को लोगों से काफी अच्छा रिस्पांस मिला। बड़ी मात्रा में चीनी, चायपती, चावल व आटा इकट्ठा हुआ है। इससे अब अगले छह महीने तक आंदोलनकारी किसानों को लंगर तैयार करने में कोई परेशानी नहीं होगी। सब्जियां फिलहाल कुछ दिनों के लिए रखी हैं। बाद में इकट्ठा फंड से सब्जियां, डीजल व अन्य जरूरी सामान खरीदा जाता रहेगा। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रालियों पर तिरपालें लगाकर इनमें ठहरने का प्रबंध किया है।
हरेक घर से ड्यूटी लगकर आते-जाते रहेंगे किसान
किसान नेता ने बताया कि गांवों में हरेक घर से एक किसान की दिल्ली मोर्चे में पहुंचने की ड्यूटी लगी है। गेहूं की कटाई व इसकी संभाल और बिक्री के वक्त बारी-बारी से किसानों को वापस उनके घरों में भेजा जाएगा, ताकि वह यह सब कर सकें । जो वापस नहीं आ सकेंगे, उनके गांव में किसी और किसान की ड्यूटी लगाई जाएगी कि वह संबंधित किसान की फसल की संभाल और इसे मंडी में बेचें। उन्होंने साफ किया कि किसी भी तरह से किसानी आंदोलन को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।