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खुदकुशी कर रहे पंजाब के किसान, फिर भी देश में सबसे अमीर राज्य, सर्वे में हुआ खुलासा

Sun, 26 Aug 2018 10:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब का किसान
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भले ही किसानों की खुदकुशी का आंकड़ा हजारों तक पहुंच चुका है, फिर भी पूरे देश में पंजाब के किसान आज भी सबसे ज्यादा अमीर हैं। यह खुलासा नाबार्ड द्वारा देश के 29 राज्यों में कराए गए एक सर्वे में हुआ है। पंजाब में किसानों के प्रति परिवार की मासिक आय 23,133 रुपये है। वहीं देश में यूपी सबसे गरीब है जहां प्रति परिवार मासिक आय मात्र 6668 रुपये है। सर्वे में पंजाब को लेकर एक खास बात यह भी सामने आई है कि पंजाब के किसान जहां कमाई में अमीर हैं, वहीं पैसा खर्च करने में उनका कोई सानी नहीं है।

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नाबार्ड द्वारा 29 राज्यों के 2016 जिलों में 40327 परिवारों को सर्वे में कवर किया गया। पंजाब के फिरोजपुर, तरनतारन, मानसा, मुक्तसर, होशियारपुर, लुधियाना, नवांशहर और मोहाली जिलों के किसानों को सर्वे में शामिल किया गया था। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में प्रति किसान परिवार सबसे ज्यादा ट्रैक्टर (31 फीसदी) हैं जबकि गुजरात (14 फीसदी) देश में दूसरे नंबर पर है। पंजाब में 98 फीसदी किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। गेहूं, धान और मक्का की पैदावार पंजाब में सबसे अधिक है और सूबे के किसानों को इससे अच्छी आय होती है। इसके अलावा, पंजाब के किसानों को राज्य सरकार की ओर से मुफ्त बिजली सुविधा दी जाती है, जिसके तहत बीते दस वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने 35000 करोड़ रुपये की बिजली किसानों को मुफ्त दी है।

सर्वे में इन विषयों की हुई पड़ताल 
इस सर्वे की विशेषता यह भी है कि इसमें किसानों की आर्थिक हालत समझने के लिए उन विषयों की पड़ताल भी शामिल की गई, जो आमतौर पर सर्वे में नजरंदाज कर दी जाती हैं। सर्वें में यह जाना गया कि जब किसान किसी आर्थिक संकट में होते हैं तो उससे निपटने/टालने के लिए वे किन-किन स्रोतों से कर्ज लेते हैं? खेती के अलावा उनके पास आय के और कौन-कौन से जरिये हैं? क्या किसानों ने किसी तरह का अपना या फसली बीमा कराया है? क्या किसान अपने पैसे को कहीं ओर निवेश भी करते हैं?
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बेहिसाब खर्च और कर्ज के जाल में फंस गए किसान
पंजाब के किसानों पर विभिन्न बैंकों का करीब 14,000 रुपये का कर्ज है। सर्वे में पंजाब के किसानों को लेकर सामने आए नतीजों से यह सवाल खड़ा हो गया है कि अगर किसान सबसे ज्यादा अमीर हैं तो सूबे में किसानों द्वारा आत्महत्या क्यों की जा रही है? इस संबंध में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री दविंदर शर्मा का कहना है कि सूबे में वर्ष 2000 से 2016 के दौरान 16,600 किसानों ने आत्महत्या की। यानी प्रतिदिन तीन किसानों ने अपनी जीवनलीला समाप्त की। 

तीन यूनिवर्सिटियों द्वारा किए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आए थे। नाबार्ड के सर्वे में कहा गया है कि सूबे में साढ़े चार लाख ट्रैक्टर हैं जबकि जरूरत केवल एक लाख ट्रैक्टरों की है। यानी 3.50 लाख ट्रैक्टरों और अन्य कृषि मशीनरी पर किया गया निवेश किसानों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है। इसके अलावा, एक और वजह से भी किसानों की कमाई का लगभग आधा पैसा हर साल डूबता रहा है। 

दरअसल, पंजाब के किसानों को धान से जहां बढ़िया कमाई हुई, वहीं इसके लगातार उत्पादन ने सूबे के भूजल स्तर को खतरे के निशान तक गिरा दिया है। पता चला है कि अब धान उत्पादक किसान हर तीसरे साल अपने ट्यूबवेल को और गहरा करने के लिए साढ़े 17 हजार करोड़ रुपये खर्च कर देते हैं। इस तरह मुफ्त बिजली, उन्नत कृषि मशीनरी के बाद भी उनकी कमाई का आधे से ज्यादा पैसा ट्यूबवेल पी जाते हैं और किसानों के लिए कर्ज की स्थिति बनी रहती है।

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