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किसान आंदोलन: पुलिस से बचने के लिए किसानों के जुगाड़... मुल्तानी मिट्टी, गीली बोरी और 10 रुपये की पतंग

Wed, 14 Feb 2024 05:04 PM IST
निवेदिता वर्मा डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़

सार

दिल्ली कूच पर अड़े किसान आंदोलनकारियों ने मंगलवार को करीब 103 बार घग्गर नदी के पुल पर बनी पक्की बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की थी। पुलिस की ओर से उन्हें रोकने के लिए लगातार आंसू गैस के गोले दागे गए। जिसने आंदोलनकारियों का दम फुला दिया। आंदोलनकारी आंख, नाक व मुंह में जलन के बावजूद पुलिस से टक्कर लेते दिखे। इसके बाद बुधवार को किसान भी तैयार दिखे।
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किसानों के जुगाड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर हजारों किसान जुटे हैं। किसान दिल्ली जाना चाहते हैं, पुलिस अनुमति नहीं दे रही। मंगलवार को बॉर्डर पर किसानों को रोकने के लिए भारी पुलिस फोर्स तैनात थी। किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। किसान भागे तो ड्रोन से आंसू गैस के गोले फेंके गए।
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इसके बाद किसानों ने जुगाड़ भिड़ाए। बुधवार को किसानों ने आंसू गैस के प्रभाव को कम करने के लिए चेहरों पर मुल्तानी मिट्टी लगाई। साथ ही कई किसानों ने बॉडी प्रोटेक्टर भी पहन लिए। 
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चेहरे पर मास्क और आंखों पर एयर टाइट चश्मे लगा लिए। जो ट्रैक्टर सबसे आगे चलाने की योजना थी, उनके सामने लोहे की चादर लगा दी गई है और उन्हें गीली बोरियों से ढक दिया गया है। इसके अलावा मिट्टी उड़ाने की मशीनें भी मंगवाई गई। 



इसके बाद किसानों ने पतंगें उड़ानी शुरू की। पहले लगा कि शायद किसान वसंत पंचमी पर पतंगबाजी कर रहे हैं, लेकिन जल्द ही उनका असली मकसद सामने आ गया। किसानों ने पंतगें उड़ाकर ड्रोन को उड़ने से रोक दिया।

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