धान की पराली को आग लगाने पर सरकार पूरी तरह से लगाम नहीं कस पाई थी कि अब गेहूं की नाड़ को जलने लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। गेहूं की कटाई के बाद अब खेतों में बची नाड़ को किसान बड़ी मात्रा में आग के हवाले कर रहे है। इससे आस-पास के एरिया में वायु प्रदूषण फैल रहा है। वही शहरी एरिया भी अब धुएं की चपेट में आना शुरू हो गए है।
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए अभी तक प्रदेश सरकार की तरफ से कोई रोक नहीं लगाई गई है। इसलिए किसान धड़ल्ले के साथ खेतों में आग लगा रहे है। पंजाब में गेहूं की फसल की कटाई के लिए कंबाइन मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। कंबाइन मशीन से गेहूं की बालियों की कटाई हो जाती है। इसके बाद खेत में बचने वाली नाड़ से तूड़ी बनाने के लिए अलग मशीन का प्रयोग किया जा रहा है।
इसके बावजूद भी खेत में चार से पांच इंच नाड़ बाकी बच गई है। इसे हटाने के लिए कोई रास्ता किसानों के पास नहीं है। ऐसे में किसान ने आग को अपना हथियार बना लिया है। खेतों में नाड़ को आग लगाकर सीधे नष्ट किया जा रहा है। इससे वातावरण में तो जहर घुल रहा है, वही जमीन के पौष्टिक तत्व भी खत्म हो रहे है। मंगलवार को मुल्लापुर दाखा, सुधार, जगरावां सहित ज्यादातर ग्रामीण एरिया में एक साथ नाड़ जलाई गई।