राज्यपाल को ज्ञापन देने पर अड़े किसान शनिवार को पुलिस बैरिकेड तोड़कर चंडीगढ़ में दाखिल हो गए। हजारों की संख्या में पहुंचे किसान करीब ढाई घंटे तक चंडीगढ़ की सड़कों पर जमा रहे। प्रदर्शन में गैंगस्टर से एक्टिविस्ट बना लक्खा सिधाना भी शामिल रहा। उस पर 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले में हिंसा फैलाने का आरोप है। लाल किले की घटना के बाद से वह फरार चल रहा है। उस पर दिल्ली पुलिस ने एक लाख का इनाम भी रखा है।
शनिवार को किसानों के हुजूम में लक्खा सिधाना के शामिल होने की सूचना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उसके व अन्य लोगों के खिलाफ ड्यूटी पर बाधा पहुंचाने और दंगा करवाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, बाकी आरोपियों की पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
बता दें कि शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे किसानों ने मोहाली के वाईपीएस चौक की ओर से चंडीगढ़ में दाखिल होने की कोशिश की। पानी की बौछार से पुलिस ने उनको रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। ट्रैक्टर से पुलिस बैरिकेड तोड़कर किसान चंडीगढ़ की सीमा में दाखिल हो गए। चंडीगढ़ में घुसते ही किसानों ने दमकल विभाग की खड़ी गाड़ियों की टोटियां खोलकर पानी बहा दिया और वाटर कैनन पर कब्जा कर लिया ताकि पुलिस उन पर पानी की बौछार न कर सके।
उसके बाद किसान हिमालय मार्ग की ओर आगे बढ़े। किसानों को आगे बढ़ता देख चंडीगढ़ पुलिस ने पूरे हिमालय मार्ग का ट्रैफिक रोक दिया। दोनों तरफ की सड़कें खाली हो गईऱ्ं। सेक्टर 34-35 के पास पुलिस की बैरिकेडिंग देखकर किसानों ने डिवाइडिंग रोड की रेलिंग ट्रैक्टर से तोड़ दी। इस दौरान एक किसान ट्रैक्टर से गिरकर घायल तक हो गया।
इन सबके बीच समर्थकों का हुजूम आगे बढ़ता रहा। इसमें शामिल कुछ लोगों ने आम लोगों की बाइक चाबी निकालकर सड़कों पर फेंक दी। इस दृश्य को पुलिस देखती रही, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
सवारियां उतार कर पुलिस ने सड़क पर खड़ी कराई बसें
किसानों का जत्था जब जेडब्ल्यूए मैरिएट चौक पर पहुंचा तो पुलिस के पास उन्हें रोकने का कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं था। ऐसे में पुलिस ने वहां से गुजर रही तीन रोडवेज बसों को रोककर सवारियों को उतार दिया और किसानों को रोकने के लिए बसें सड़क पर खड़ी कर दीं। इस दौरान सवारियों ने पुलिस को मना किया कि उन्हें न उतारा जाए, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इस बीच चौक पर पहुंचे किसान बसों को धक्का मारकर हटाने लगे। इससे बसों के शीशे टूट गए। यही स्थिति प्रेस लाइट प्वाइंट पर भी रही। किसानों ने सेक्टर 17-18 लाइट प्वाइंट पर खड़ी पीसीआर को भी नहीं बख्शा। उसे धक्का मारकर हटा दिया।
प्रेस लाइट प्वाइंट पर माहौल हुआ था तनावपूर्ण
किसान जब राजभवन के नजदीक सेक्टर -17 प्रेस लाइट प्वाइंट पर पहुंचे तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए फिर से सीटीयू की बसें सड़क पर खड़ी कर दीं। इससे गुस्साए किसानों ने बसों को धक्का देकर उसे हटाने की कोशिश की। किसानों के तेवर देख चंडीगढ़ व पंजाब पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां बुला ली गईं। तनाव इतना बढ़ गया कि मौके पर चंडीगढ़ पुलिस के डीआईजी, एसएसपी व एसपी को आना पड़ा। उनके पहुंचने के बाद हालात काबू में आए।
डीसी ने प्रेस लाइट प्वाइंट पर किसान नेताओं से लिया ज्ञापन
पंजाब राजभवन की तरफ कूच करने वाले किसानों से डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने प्रेस लाइट प्वाइंट पर ही ज्ञापन ले लिया और किसानों को भरोसा दिया कि वह तुरंत इसे राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर तक पहुंचा देंगे। डीसी ने सभी किसानों से वापस लौट जाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों का एक पत्र उन्हें सौंपा है। इस ज्ञापन को राज्यपाल को सौंप दिया जाएगा। डीसी बराड़ ने सभी किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि चंडीगढ़ में प्रदर्शन करने के लिए पहले इजाजत लेनी पड़ती है और उसके लिए एक स्थान चिह्नित किया गया है। किसानों ने बड़ी जिम्मेदारी के साथ प्रशासन के साथ सहयोग किया है, इसलिए ही किसी तरह की समस्या किसी को भी नहीं हुई। प्रदर्शन से न तो लोगों को परेशानी हुई, न ही किसी प्रदर्शनकारी के साथ कोई जबरदस्ती की गई है।