-बिजली संशोधन बिल और बीज अधिनियम रद करने की मांग, जमकर की नारेबाजी
-अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। किसान मजदूर मोर्चा (भारत) चैप्टर पंजाब के आह्वान पर वीरवार को पंजाब भर में किसानों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित मंत्रियों और विधायकों के आवासों के बाहर धरने देकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पटियाला में किसानों ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह की कोठी के बाहर धरना दिया। प्रदेश के 18 जिलों में कुल 28 स्थानों पर हुए इन प्रदर्शनों के दौरान किसानों ने जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगें दोहराईं।
धरनों में प्रमुख रूप से बिजली संशोधन बिल और बीज अधिनियम को रद करने, अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग उठाई गई। किसानों ने पंजाब सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इन कानूनों और समझौतों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने की मांग की। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। साथ ही 21 फरवरी को नौजवान शुभकरण की देशभर में बरसी मनाने की घोषणा भी की गई।
शंभू-खनौरी मोर्चों में नुकसान का मुआवजा देने की मांग
इस मौके पर किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि शंभू और खनौरी मोर्चों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके लिए 3 करोड़ 77 लाख रुपये का मुआवजा तुरंत दिया जाए। उन्होंने किसानों-मजदूरों की संपूर्ण कर्ज माफी, आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों और शहीदों के परिजनों को शेष मुआवजा व सरकारी नौकरियां देने की मांग भी उठाई। पंधेर ने कहा कि जिन अधिकारियों ने किसानों और मजदूरों पर अत्याचार किए या उनका सामान चोरी किया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बाढ़ से नष्ट हुई फसलों, घरों और पशुओं के नुकसान का शेष मुआवजा भी तुरंत जारी किया जाए।
स्मार्ट मीटर, पराली केस और खाद संकट पर भी उठे सवाल
पंधेर ने मांग की कि उन्होंने स्मार्ट मीटर और प्री-पेड मीटर जबरन लगाए जाने पर भी तुरंत रोक लगाने की मांग की। पराली प्रदूषण के नाम पर की गई रेड एंट्रियों, जुर्मानों और पुलिस मामलों को वापस लेने, यूरिया खाद की कमी दूर करने और कालाबाजारी रोकने की मांग भी उठी। साथ ही चल रहे गन्ना सीजन की बकाया भुगतान राशि किसानों को तुरंत देने पर जोर दिया गया।
नशे और बजट पर सरकार को घेरा
किसान नेताओं ने गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में निर्दोष युवाओं और उनके परिजनों पर हो रहे कथित अत्याचार बंद करने की मांग की। नशे की चपेट में आए युवाओं के इलाज और पुनर्वास और बड़े नशा माफिया पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही सीमा पार से ड्रोन के जरिए आ रहे नशे पर रोक लगाने की मांग केंद्र सरकार से की गई। सरवन सिंह पंधेर ने केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें कृषि, किसान, मजदूर और आम जनता को नजरअंदाज किया गया है। खाद पर 10 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी घटाने को उन्होंने कॉरपोरेट-पक्षीय फैसला बताया।