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मुख्यमंत्री आवास घेरने जा रहे किसानों को पुलिस ने रोका

Tue, 15 Mar 2016 02:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली।
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सीएम आवास का घेराव करने जा रहे किसानों को पुलिस ने चंडीगढ़ सीमा पर ही रोक दिया। - फोटो : अमर उजाला
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सीएम आवास का घेराव करने जा रहे किसानों को पुलिस ने चंडीगढ़ सीमा पर ही रोक दिया। इस दौरान किसानों ने वहीं बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसी बीच सीएम कार्यालय से एक अधिकारी मांग पत्र लेने के लिए मौके पर पहुंचा। उन्होंने किसानों की मांगों को सुना। इसके बाद किसानों ने धरना खत्म किया। साथ ही सड़क से आवाजाही शुरू हो पाई। धरने के चलते घंटों लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। चंद मिनटों के सफर को पूरे शहर का चक्कर लगाना पड़ा।
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जानकारी के मुताबिक, राज्य के विभिन्न जिलों से किसान सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (सिद्धुपुर) के बैनर तले जुटे। फेज-आठ में किसानों ने अपनी रैली की। इस दौरान कई किसान नेताओं ने रैली को संबोधित किया। इसके बाद  दोपहर को किसान यूनियन के अध्यक्ष पिशौरा सिंह सिद्धुपुर व महासचिव बोघ सिंह मानसा की अगुआई में चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया।

किसानों को चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर 52 में गीता भवन के पास बैरीकेड्स लगाकर रोक लिया। किसानों का प्रोग्राम मुख्य मंत्री के निवास पर जाकर उन्हें मांग पत्र सौंपने का था। पुलिस के रोकने पर किसान वहीं सड़क पर बैठ कर ही धरना देने लगे। इस दौरान उन्होंने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मौके सीएम आवास का एक अधिकारी पहुंचा। जिन्हें किसानों ने अपना मांग पत्र सौंपा।
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कर्ज में डूबे किसानों के ऋण माफ हो
यूनियन के अध्यक्ष पिशौरा सिंह ने कहा कि काफी समय से केंद्र सरकारों की गलत नीतियों के कारण किसान कर्ज में डूबे हैं। किसानों के सरकारी, गैर सरकारी व अर्ध सरकारी ऋण खत्म किए जाने चाहिए। क्योंकि पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने संसद में बयान दिया था कि फसलों के दाम कम दाम दिए जाने से किसानों का तीन लाख हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस कारण केंद्र सरकार ने 70 हजार करोड़ रुपये माफ किए थे। उस बयान मुताबिक ये ऋण माफ किए जाएं।

बारिश से हुए नुकसान के लिए हो गिरदावरी
किसानों ने कहा कि बेवक्त की बारिश के साथ हुए नुकसान की गिरदावरी करवा कर किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए विधान सभा में प्रस्ताव पास करने की मांग भी रखी।

पंजाब की नदियों के पानी पर पंजाब का हक
धरने को संबोधन करते हुए यूनियन के महासचिव बोघ सिंह मानसा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिपेरियन कानून के मुताबिक पंजाब की नदियों के पानी पर पंजाब का हक बहाल रखा जाए। यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि हर हालत में स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू की जाए।

जाति नहीं आर्थिक स्थिति के आधार पर हो आरक्षण
यूनियन के उपाध्यक्ष मेहर सिंह थेड़ी ने मांग की है कि केंद्र सरकार ने जो जाति आधारित कानून आरक्षण के लिए बनाया है। वह दस वर्ष के लिए था। लेकिन उसमें बार-बार बढ़ोतरी की जा रही है। इसमें बढ़ोतरी बंद करके आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जाए।

अलग से हो खेती बजट
काका सिंह कोटला व मान सिंह कैशियर ने मांग रखी है कि हमारा देश खेती प्रधान देश है। इस देश की 60 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर करती है। इस लिए निर्भरता के आधार पर आबादी के मुताबिक खेती बजट में बढ़ोतरी की जाए व रेलवे की भांति अलग खेती बजट तैयार किया जाए।
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