फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: सीटीयू की एसी बस से भी कम होगा चंडीगढ़ में चलने वाली मेट्रो का किराया

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। शहर में प्रस्तावित मेट्रो का किराया सीटीयू की एसी बसों से भी कम होगा। शुरुआती प्रस्ताव के मुताबिक मेट्रो का न्यूनतम किराया 14 और अधिकतम 84 रुपये होगा, जिसमें हर साल 5 फीसदी की वृद्धि तय की गई है। मेट्रो परियोजना की अनुमानित लागत अब 25,631 करोड़ से 30,498 करोड़ बताई गई है। इस संबंध में मंगलवार को राइट्स के साथ बैठक हुई, जिसमें परियोजना के वित्तीय और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई।
विज्ञापन

हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) ने बताया कि 2031 से मेट्रो सेवा शुरू होने के साथ ही किराया ढांचा भी लागू कर दिया जाएगा। शुरुआती प्रस्ताव के अनुसार मेट्रो का किराया यात्रा की दूरी के अनुसार तय किया जाएगा। पहले दो किमी के लिए 14 रुपये होगा। यह सीटीयू की एसी बस से भी कम है, क्योंकि उसका न्यूनतम किराया 15 रुपये है। हालांकि मेट्रो का अधिकतम किराया 84 रुपये तक रहेगा।
राइट्स ने बताया कि मेट्रो के पूरा होने की लागत (केंद्रीय और राज्य करों सहित) 25,631 करोड़ या 30,498 करोड़ रुपये होगी। इन लागत अनुमानों में भूमि की लागत और पुनर्वास और पुनर्स्थापन की लागत शामिल नहीं है। उसे शामिल करने पर परियोजना की कुल लागत में और वृद्धि होगी। राइट्स ने प्रेजेंटेशन देकर बताया कि ट्राइसिटी में मेट्रो 2056 के प्रोजेक्शन के हिसाब से लाभदायक रहेगी। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि उस अनुसार भी ट्राइसिटी में मेट्रो फिट बैठती है। हालांकि कमेटी में शामिल अधिकारी इससे संतुष्ट नजर नहीं आए।
विज्ञापन


अन्य शहरों में राइट्स की ओर से बताई प्रोजेक्शन की कमेटी ने मांगी रिपोर्ट
कमेटी ने कहा है कि मेट्रो राइडरशिप को 2051 के बजाय वर्तमान की स्थिति के हिसाब से देखा जाना चाहिए। इस पर राइट्स ने जिन-जिन शहरों में वर्तमान में मेट्रो चल रही है, उसका भी हवाला दिया। अब कमेटी ने राइट्स से पूछा है कि दिल्ली या अन्य शहरों में जब डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई गई थी तो उस दौरान राइट्स ने वर्ष 2025 को लेकर सवारियों का जो प्रोजेक्शन बताया था, उसके अनुसार अब उतनी सवारी है या नहीं। इस पर राइट्स को अगली बैठक में विस्तृत रिपोर्ट लाने को कहा गया है। दरअसल, राइट्स लगातार यह कह रहा है कि ट्राइसिटी में मेट्रो एकदम फिट है, लेकिन प्रशासन राइडरशिप और वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर संदेश में है कि अगर मेट्रो चला दी जाए तो क्या उतनी सवारियां मिलेगी या नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें