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चंडीगढ़: वरिष्ठ रंगकर्मी गुरचरण सिंह चन्नी का निधन, कोरोना संक्रमण ने छीन ली जिंदगी

Thu, 20 May 2021 09:42 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जीएस चन्नी सामुदायिक रंगमंच के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।  
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रंगकर्मी गुरचरण सिंह चन्नी। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मशहूर नाटक ‘जिंदगी रिटायर नहीं होती’ के निदेशक और प्रसिद्ध रंगकर्मी गुरचरण सिंह चन्नी का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह कोरोना से संक्रमित थे और लगभग एक महीने से इस बीमारी से जूझ रहे थे। बीते 15 दिनों से वह मोहाली स्थित फोर्टिस में वेंटिलेटर पर थे। उनके संक्रमित होने की जानकारी जब लोगों को हुई तो उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना के साथ सोशल मीडिया के जरिए उनके लिए प्लाज्मा समेत अन्य मदद के लिए मुहिम भी चलाई गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

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थिएटर कलाकार और जीएस चन्नी की करीबी प्रीति जैन ने बताया कि लगभग 10 वर्षों से वह उनके साथ काम कर रही हैं। उन्होंने थिएटर की बारीकियों के साथ क्लाउनिंग तकनीक उनसे सीखी हैं। वह उनके साथ अस्पतालों में जाती थीं, जब वह मरीजों और बच्चों को जोकर बनकर हंसते रहने और जीवन जीने की सीख देते थे। आज वह खुद हम सबको उदास कर चले गए हैं। 


प्रीति ने बताया उनकी आखिरी मुलाकात इसी वर्ष उनकी शादी की सालगिरह पर हुई थी। तब हम मजाक कर रहे थे कि अब बच्चे बड़े हो गए हैं, आपको हर साल हनीमून पर जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जीएस चन्नी की पत्नी हरलीन कौर भी कोरोना संक्रमित हैं और वह भी फोर्टिस अस्पताल में उपचाराधीन थीं। वह ठीक हुईं, फिर उनका बेटा ज्ञानदेव और बेटी सुखमनी और जीएस चन्नी खुद कोरोना संक्रमित हो गए। शुरुआत में सभी घर में ही क्वारंटीन थे, लेकिन पिछले लगभग 15 दिन पहले जीएस चन्नी का ऑक्सीजन स्तर कम होने पर उन्हें फोर्टिस में भर्ती करवा दिया गया। तब से वह वेंटिलेटर पर थे। बीच में खबर मिली थी कि वह ठीक हो रहे हैं, लेकिन हफ्ता पहले उनके फेफड़ों में संक्रमण हो गया और हालत फिर खराब हो गई।

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मां से किया वादा अंत तक निभाया, कभी केश नहीं कटवाए 

थिएटर कलाकार रानी बलबीर कौर ने बताया कि जीएस चन्नी पंजाब यूनिवर्सिटी में उनके सहपाठी थे और अच्छे मित्र भी। शुरुआत के दौर में उन्होंने हयवदन सहित कई नाटक साथ किए। 1972 में थिएटर विभाग के पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा में दाखिले के लिए वह अपनी मां के साथ आए थे। उस दौरान उनकी मां ने कहा था कि एक्टिंग दी इको शर्त है, अपने केश कदि न कटवाईं। चन्नी ने अपनी मां को तब जुबान दी और उसको अंत समय तक निभाया। उन्होंने फिल्म और रंगमंच की दुनिया में बहुत से किरदार निभाए, लेकिन अपनी सादगी और पंजाबीयत को वे साथ लेकर चले। थोड़े समय पहले वे घर आए थे तब मुलाकात हुई थी, वे बच्चों के साथ बच्चे हो जाते थे। मिमिक्री करना, बच्चों को हंसाना.. उन्हें बहुत पसंद था। आज बच्चे भी उन्हें बहुत याद कर रहे हैं। एक जिंदादिल इंसान का यूं चले जाना.. बहुत बड़ा जुल्म हुआ है ये हम पर। 

चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के निदेशक भी रहे, कम्युनिटी थिएटर के लिए मिला था अवार्ड
रंगकर्मी जीएस चन्नी ने 1973-74 में कम्युनिटी थिएटर के लिए काम करना शुरू किया। उन्हें इसके लिए संगीत नाटक अकादमी ने अवार्ड से भी नवाजा। उन्होंने चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के निदेशक के रूप में भी लगभग आठ साल काम किया। उन्होंने जालंधर दूरदर्शन के लिए कई नाटक किए। उनके नाटक सामाजिक एकता, प्रेम, औरतों के मुद्दों सामाजिक मुद्दों इत्यादि पर आधारित होते थे। उनके दफा 144, अक्ख दी दहलीज, जिंदगी रिटायर नहीं होती, रॉकेट हो या बंब, पहनो कंडोम इत्यादि नाटक लोगों में काफी पसंद किए गए। टुटू सहित उन्होंने कई टेलीफिल्म्स और दो दर्जन से भी अधिक डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं। चन्नी ने टीवी फिल्म निर्माता, अभिनेता, रंगकर्मी, नाटककार, निदेशक इत्यादि कई भूमिकाओं को बखूबी निभाया।
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