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पोर्न चुटकुलों से दुखी संता-बंता ने 18 साल बाद बदला नाम

Tue, 17 Nov 2015 06:09 PM IST
नरिंदर वैद्य/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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मशहूर कॉमेडियन संता बता ने अपना नाम बदल कर शुगली-जुगली रखने का एलान किया है। बीते 30 से ज्यादा सालों में कॉमेडी करने वाले संता-बंता ने 18 साल तक चलने वाले इस नाम को अलविदा कह दिया है।
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उन्होंने यह फैसला उनके नाम पर बन रहे अश्लील चुटकुलों से आहत होकर लिया है। उनका कहना है कि संता-बंता का नाम लेकर लोगों की ओर से सिख समुदाय को टारगेट कर उनका मजाक बनाया जाता था।

इससे सिख समाज खासतौर पर आहत हो रहा था। उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती थी। संता बंता ने कहा कि कोई भी अश्लील चुटकुले के दौरान लोगों के जहन में उनकी शक्ल आती थी।
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संता-बंता एक लंबे समय से लोगों को हंसाने का काम कर रहे हैं। वैसे संता का असली नाम गुरप्रीत सिंह और बंता का प्रभप्रीत सिंह हैं। ये दोनों भाई जालंधर में रहते हैं। बड़े भाई संता इस समय भी जालंधर में एक बैंक में काम कर रहे हैं। छोटा भाई प्रभप्रीत अपनी प्रोडक्शन कंपनी चला रहे हैं।

संता-बंता अपने इस कार्यकाल में दूरदर्शन पर करीब 800 शो कर चुके हैं। उन्होंने दूरदर्शन पर अपने भाई के साथ 1988 में पहला प्रोग्राम संदली पैणा किया था। इसके बाद 1995 में उन्होंने दूरदर्शन पर रौनक मेला, नव वर्ष के कार्यक्रम लारा लप्पा व बच के मोड़ तो भी किया। संता-बंता बैंकॉक, सिंगापुर व टोरंटो में भी कई स्टेज शो कर लोगों को हंसा चुके हैं।
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आतंकवाद के दौर में भी शो कर लोगों को हंसाया

संता बंता ने इसके बाद साल 2000 में अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। इसके तहत शार्ट एपीसोड बनाने शुरू किए। उनको एक एपीसोड जिसका नाम पहले जरा सोचो था, अपने 104 एपीसोड पूरे कर चुका है। इसका नाम दो बार बदला गया। इसका नाम पहले सोचो ते विचारो था व अब यह नेक सलाह के नाम पर चल रहा है।

संता-बंता का कहना है कि वे 84 दंगों के दौरान लोगों में डर को दूर करने व उन्हें हंसाने के लिए सरकारी शो किया करते थे। सरकार की तरफ से उनको पूरी सुरक्षा दी जाती थी। उन्होंने कहा कि वे 1982 से 1992 तक मशहूर पंजाबी कामेडियन चाचा रौणकी राम के साथ भी कामेडी शो कर चुके हैं। उनका हर शो जागरूकता और मानवता के लिए एक संदेश देने के लिए होता था।

प्रोड्यूसर के कहने पर रखा संता-बंता नाम: गुरप्रीत सिंह और प्रभप्रीत सिंह ने एक प्रोड्यूसर के कहने पर अपना नाम संता-बंता रख लिया था। 1997 में जब वे नव वर्ष का प्रोग्राम काला डोरिया कर रहे थे तो उनके प्रोड्यूसर ने उन्हें अपना नाम बदलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मशहूर लेखक व कार्टूनिस्ट खुशवंत सिंह अपने लेख में संता-बंता का जिक्र करते हैं। आप दोनों संता-बंता बन जाओ। इसके बाद उन्होंने अपना नाम संता-बंता रख लिया, जो काफी मशहूर भी हुआ।
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