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Chandigarh News: परिवार का साथ बढ़ा रहा आत्मविश्वास, आसान हो रही जिम्मेदारियों की राह

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चंडीगढ़। काम और घर की दोहरी जिम्मेदारियों का बोझ आज भी मौजूद है। लेकिन अब पति और परिवार के सहयोग, खुद के भीतर आया आत्मविश्वास और कार्यस्थल पर उपलब्ध सुविधाएं इस बोझ को धीरे-धीरे हल्का कर रही हैं। यह बातें शहर की कामकाजी महिलाओं ने शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम में माहौल सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ था। यहां महिलाओं ने न सिर्फ अपनी चुनौतियां साझा कीं बल्कि उस बदलाव की कहानी भी सुनाई जो अब उनके जीवन में गूंजने लगा है।
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कार्यक्रम में कई महिलाओं ने बताया कि पहले त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में वे सिर्फ औपचारिकता निभा पाती थीं। जिम्मेदारियों का दबाव उन्हें थका देता था। अब घर में काम का बंटवारा, पति का सपोर्ट और परिवार का सहयोग उनकी दिनचर्या को संतुलित कर रहा है। अब त्योहार सिर्फ जिम्मेदारी नहीं आनंद बन गए हैं। बच्चों की देखभाल से जुड़ी मुश्किलें भी चर्चा का अहम हिस्सा रहीं। विशेषकर नाइट ड्यूटी और 24 घंटे काम की जिम्मेदारी के बीच सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की होती है। उन्होंने कहा कि संस्थानों में मिल रही क्रेच सुविधा थोड़ी और बेहतर हो तो उनकी ये चिंता दूर हो सकती है।
कार्यस्थल पर बढ़ती संवेदनशीलता और महिलाओं में आए आत्मविश्वास ने भी माहौल बदल दिया है। पहले की अपेक्षा अब सकारात्मकता ने माहौल बदल दिया है। महिलाओं ने यह भी कहा कि सुविधाएं मौजूद हैं। अगर सरकार और संस्थान इन्हें और सुदृढ़ कर दें (विशेषकर क्रेच, सुरक्षित माहौल और फ्लेक्सिबल वर्किंग सिस्टम) तो महिलाओं की आधी चुनौतियां अपनेआप खत्म हो जाएंगी। महिलाओं ने कहा कि जिम्मेदारी के बीच अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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कार्यक्रम में शामिल महिलाएं : एसआई बबिता, कांस्टेबल पूनम, पीजीआई नर्सिंग एसोसिएशन की प्रधान मंजनीक, नगर निगम कर्मचारी पूनम कोठारी, दीपा मेहता, परवीन कुमारी, प्रिंसिपल प्रो. नीरू मलिक, टीचर जसविंदर कौर, एडवोकेट आरती, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मल्लिका और नर्सिंग ऑफिसर जैस्मिन कौर।
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