बेटी ने काफी संघर्ष किया और अच्छा खेली। मुकाबला काफी टफ रहा। सभी बेटियां अंतिम पल तक संघर्ष करती रही। बेटी को आगे बढ़ने के और भी मौके मिलेंगे। इन बेटियों से अन्य बेटियों को भी प्रेरणा मिलेंगी। मैच में हार-जीत होती रहती है लेकिन बेटी ने देश का मान बढ़ाया है। - गीता देवी, उदिता की माता, न्यू पुलिस लाइन निवासी।
हमें काफी खुशी है कि एक अनपढ़ किसान की बेटी छोटी सी उम्र में इस स्तर पर पहुंची है। अभी बेटी की खेलने की उम्र है। बेटी को आगे और भी खेलने के मौके मिलेंगे। मैच जीत जाते तो और भी ज्यादा खुशी होती। अब बेटी और मेहनत करेंगी। खेल कोई भी हो हार-जीत तो होगी लेकिन टीम में शामिल बेटियों ने हौसला नहीं हारा। अंतिम क्षण तक संघर्ष किया। - सुरेश गोदारा, शर्मिला के पिता, कैमरी निवासी।
सातवीं कक्षा से थामी थी उदिता ने हॉकी
न्यू पुलिस लाइन की रहने वाली उदिता ने कक्षा सातवीं से ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। हालांकि उदिता पहले हैंडबाल खेलती थीं, लेकिन कोई कोच नहीं मिला। एक दिन उदिता ने स्कूल मैदान में लड़कियों को हॉकी खेलता देखा तो उसने मन में हॉकी में ही करिअर बनाने की ठान ली। उसके बाद उदिता ने हॉकी का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। उदिता के पिता जसबीर सिंह हरियाणा पुलिस में ईएसआई के पद पर कार्यरत थे लेकिन वर्ष 2015 में उनका बीमारी के चलते निधन हो गया लेकिन उदिता ने अपना हौसला नहीं तोड़ा।