-असमान वैश्विक प्रवर्तन पर वर्ल्ड एमएसएमई फोरम की चेतावनी
-सख्त भारतीय कानून, ढीली विदेशी कार्रवाई से बिगड़ा प्रतिस्पर्धी संतुलन
-संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बौद्धिक संपदा (आईपी) और ट्रेडमार्क कानूनों के असमान प्रवर्तन ने भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम (डब्ल्यूएमएफ) ने इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाते हुए कहा है कि भारत में जहां नकली, डुप्लीकेट और लुक-अलाइक उत्पादों पर दुनिया के सबसे सख्त कानून लागू हैं, वहीं चीन और बांग्लादेश जैसे देशों में कमजोर या चयनात्मक कार्रवाई से वहां के निर्यातकों को अनुचित बढ़त मिल रही है। इसका सीधा और दोहरा नुकसान भारतीय उद्योग और कानून का पालन करने वाले एमएसएमई निर्यातकों को झेलना पड़ रहा है।
डब्ल्यूएमएफ के प्रधान बदीश जिंदल के अनुसार भारत में ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामलों में त्वरित छापेमारी, माल जब्ती, भारी जुर्माना, आपराधिक मुकदमे और कई मामलों में छोटे उद्यमों के प्रमोटरों की गिरफ्तारी तक की कार्रवाई होती है। इसके विपरीत चीन और बांग्लादेश में निर्यात उन्मुख इकाइयों पर ऐसी कार्रवाई लगभग नहीं के बराबर है। नतीजतन, वहां बने नकली और लुक-अलाइक उत्पाद आसानी से वैश्विक बाजारों तक पहुंच जाते हैं।
फोरम की ओर से पेश की गई तुलना के अनुसार भारत में ट्रेडमार्क कानूनों का कठोर और व्यापक पालन होता है। चीन में कार्रवाई चयनात्मक है और मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित रहती है जबकि निर्यात इकाइयों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। बांग्लादेश में स्थिति और भी कमजोर है, जहां ट्रेडमार्क उल्लंघन पर कार्रवाई दुर्लभ मानी जाती है। भारत में जहां भारी जुर्माना, अभियोजन और जीएसटी व पुलिस की संयुक्त कार्रवाई होती है, वहीं चीन में जुर्माना लगभग शून्य और बांग्लादेश में नाममात्र का है।
भारी कीमत चुका रहा भारतीय उद्योग
भारतीय निर्माता ट्रेड मार्क्स एक्ट-1999, कस्टम्स आईपीआर नियमों और जीएसटी कानूनों के तहत कड़े अनुपालन के साथ काम करते हैं। मामूली ब्रांडिंग समानता या तकनीकी चूक पर भी फैक्ट्री सील, माल जब्ती और आपराधिक केस दर्ज हो जाते हैं। इससे उपभोक्ता संरक्षण तो मजबूत होता है, लेकिन एमएसएमई के लिए उत्पादन लागत, कानूनी जोखिम और अनुपालन खर्च अत्यधिक बढ़ जाता है। डब्ल्यूएमएफ का आरोप है कि चीन और बांग्लादेश में नकली व लुक-अलाइक ब्रांड बनाने वाली फैक्ट्रियां खुलेआम संचालित हो रही हैं। इनके उत्पाद 100 से 150 प्रतिशत तक कम कीमत पर वैश्विक बाजारों में पहुंचते हैं। परिणामस्वरूप भारतीय उच्च गुणवत्ता वाले असली उत्पाद कीमत की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं और उनकी ब्रांड साख भी प्रभावित होती है। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने कहा कि भारत ईमानदारी और कानून पालन की कीमत चुका रहा है। जब विदेशों में नकली निर्यातकों पर कार्रवाई नहीं होती और भारत में एमएसएमई पर सख्ती होती है, तो मुक्त व्यापार, अनुचित व्यापार में बदल जाता है।
प्रमुख मांगें
-आईपी और ट्रेडमार्क कानूनों का समान वैश्विक प्रवर्तन।
-उच्च जोखिम वाले देशों से आने वाले निर्यात की कड़ी जांच।
-नियमों का पालन करने वाले भारतीय निर्यातकों के लिए ट्रेड सेफगार्ड।
-डब्ल्यूटीओ और डब्ल्यूआईपीओ के माध्यम से हस्तक्षेप।
-भारतीय एमएसएमई पर अनुपालन बोझ की आधिकारिक मान्यता।