चंडीगढ़। पुलिस विभाग में डीजीपी के फेयरवेल और वेलकम परेड में टेंट लगवाने के नाम पर लाखों रुपये के फर्जी बिल बनाने का मामला सामने आया है। यूटी पुलिस के रिटायर्ड हवलदार जगजीत सिंह ने सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) दिल्ली को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि इन दोनों कार्यक्रमों में एक ही फर्म ने टेंट लगाया था, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने दो अलग-अलग फर्मों के नाम पर बिल बनाकर लाखों रुपये का गबन किया है।
आरोप है कि सेक्टर 26 स्थित पुलिस लाइन में 19 अगस्त 2021 को डीजीपी संजय बेनिवाल की फेयरवेल और 20 अगस्त को नए डीजीपी प्रवीन रंजन की वेलकम परेड में एक ही टेंट का इस्तेमाल किया गया था लेकिन पुलिस अधिकारियों ने दो अलग-अलग फर्मों के नाम पर 1 लाख 99 हजार रुपये के दो बिल बनाए। उन्होंने सीवीसी को दोनों कार्यक्रमों की तस्वीरें सबूत के तौर पर दी हैं, जिससे यह साबित होता है कि दोनों दिन एक ही टेंट लगाया गया था। यही नहीं, जिस फर्म के नाम पर वेलकम परेड में टेंट लगाने का बिल बनाया गया, उस फर्म के मालिक ने खुद कहा है कि उन्होंने 20 अगस्त 2021 को कोई टेंट नहीं लगाया था। यह भी आरोप लगाया है कि तत्कालीन एसएसपी हेडक्वार्टर ने वेलकम और फेयरवेल के कार्यक्रम की फोटोग्राफ्स अपने ऑफिस में नष्ट करवा दी थीं।
तत्कालीन एसपी ने तथ्य छुपाए
शिकायतकर्ता ने लोकल परचेज कमेटी पर भी गलत सर्वे रिपोर्ट देने का आरोप लगाया है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दोनों दिन अलग-अलग फर्मों ने टेंट लगाए थे। शिकायतकर्ता ने चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व दो आईपीएस और दानिप्स कैडर के तीन डीएसपी पर 10 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप लगाया है, जिसमें से एक यह टेंट का मामला भी है। जगजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि जब सीवीओ ने इस मामले में डीजीपी चंडीगढ़ से फैक्चुअल रिपोर्ट मांगी, तो तत्कालीन एसपी ने एडवाइजर से कुछ तथ्य छिपा लिए। इस मामले में अभी जांच चल रही है।