लॉकडाउन मजदूर वर्ग पर बहुत भारी पड़ रहा है। मजदूर भारी संख्या में परिवार के साथ अपने गांवों की ओर पलायन कर रहे है। इनमें ज्यादातर मजदूर निर्माण क्षेत्र से जुड़े हैं। रेल, बस सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवा बंद होने से ये मजदूर पैदल ही परिवार के साथ अपने पैतृक गांवों की ओर निकल पड़े हैं। मजदूरों का पलायन प्रधानमंत्री की घोषणा के अगले दिन से ही शुरू हो गया लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन को इन मजदूरों का ध्यान रविवार को आया। मुल्लांपुर स्थित ओमैक्स में मार्बल का काम करने वाले भूर सिंह भी अपने भाइयों के साथ राजस्थान के करौली के लिए पैदल निकले हैं। उन्हें न रास्ता पता है, न ही यह कि कितने दिन लगेंगे लेकिन परिवार के पास पहुंचने के लिए वह सबकुछ सहने के लिए तैयार हैं।
राजस्थान के लिए निकले लोगों से ने कहा...
राजस्थान कैसे जाएंगे, पता नहीं गांव में पत्नी-बच्चे अकेले हैं। यहां पर काम बंद हैं। जो पैसे थे, वो लगभग खत्म हो गए हैं। गांव न जाएं, तो कहां जाएं। हम सभी मुल्लांपुर से पैदल निकले हैं और राजस्थान के करौली जाना है। अभी पता नहीं कैसे जाएंगे।
- भूर सिंह, मजदूर
मुल्लांपुर में ही काम करने वाले करीब 11 लोग भी दो दिन पहले पैदल ही निकले थे। वह पैदल ही चले लेकिन उन्हें रास्ते में मदद मिल गई और किसी तरह घर पहुंच गए हैं। उनसे ही हमें हिम्मत मिली और फिर घर जाने के लिए निकले हैं। - देव सिंह, मजदूर
550 किमी है, किसी न किसी तरह पहुंच ही जाएंगे काम चल नहीं रहा है तो यहां रह कर क्या करेंगे। परिवार भी अकेला है, हमे भले ही दिक्कत होगी लेकिन किसी तरह घर तो पहुंच जाएंगे। हम नहीं चाहते कि इस मुश्किल की घड़ी में परिवार को अकेला छोड़ दें। 550 किमी है दूर है घर लेकिन किसी न किसी तरह पहुंच ही जाएंगे।
- पूरन सिंह, मजदूर