चुनाव से पहले भाजपा में बढ़ रही आपसी गुटबाजी और अनुशासनहीनता ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चिंता बढ़ा दी है। चुनाव में महज 15 दिनों का ही समय बचा है। ऐसे में नेताओं के लिए सबसे चुनौती यही है कि कार्यकर्ताओं को किस प्रकार एकजुट किया जाए। इसी मामले को लेकर मंगलवार को पार्टी की बैठक होती रही। सोमवार रात पूर्व पार्षद अनिल दुबे और मंडल अध्यक्ष मुकेश राय के बीच मारपीट हुई थी। झगड़े में चाकू भी चले थे। पार्टी ने मारपीट की वजह आपसी रंजिश बताया।
कार्यकर्ताओं पर नहीं कोई नियंत्रण
सूत्रों का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण नहीं है। एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि मौजूदा अध्यक्ष संजय टंडन भी पार्टी में एकजुटता नहीं ला पाए हैं, जिसका नतीजा ये है कि कार्यकर्ता उनके व अन्य बड़े नेताओं के सामने ही लड़ने पर उतारू हो जाते हैं। पहले भी पार्टी में कई बार ऐसे विवाद पैदा हो चुके हैं। अभी हाल ही में एससी मोर्चा के कार्यकर्ता भी टंडन से उलझ पड़े थे।
भाजपा कार्यालय में 30 जनवरी को भी चले थे लात-घूंसे
इसी साल 30 जनवरी को भी कुछ ऐसा ही हुआ था। पंजाब प्रदेश भाजपा कार्यालय, सेक्टर-37 में खूब लात-घूंसे चले थे। चंडीगढ़ लोकसभा सीट से उचित उम्मीदवार के लिए सुझाव मांगे गए थे। इस दौरान पार्टी के दो नेताओं गुरप्रीत ढिल्लों और नरेंद्र चौधरी में मारपीट हो गई थी। तब भी बैठक में सभी वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
अनुशासनहीनता पर संजय टंडन के जवाब
सवाल: पार्टी कार्यालय में हुए झगड़े पर आप क्या कार्रवाई करेंगे?
जवाब: दो नेताओं का यह निजी मामला था। हम मामला सुलझाने के लिए उन्हें बैठाकर बातचीत करेंगे।
सवाल: अगर निजी मामला था तो उन्होंने पार्टी ऑफिस में ही झगड़ा क्यों किया?
जवाब: अब हम किस-किस को समझाएंगे।
सवाल: पार्टी ऑफिस में पहले भी ऐसे झगड़े हुए हैं, आपने कभी कोई कार्रवाई की?
जवाब: राजनीतिक पार्टियों में ऐसा चलता रहता है। पार्टियों में कई तरह के लोग होते हैं।