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'इब्तदा-ए इश्क है, रोता है क्या, आगे-आगे देखिए...'

Sun, 30 Mar 2014 11:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
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अपने तीखे तेवरों के लिए मशहूर कैप्टन अमरिंदर ने रविवार को अपने फेसबुक पेज पर अमृतसर में अपने विरोधी अरुण जेटली के नाम एक पोस्ट लिखी है।
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इसमें उन्होंने जेटली को तीखे हमलों को झेलने की नसीहत दी है।

- मेरे प्यारे दोस्त अरुण जेतली गंभीर रूप से चिंतित लग रहे हैं। वह निरंतर मुझसे असंतुष्ट रहते हैं। उनकी लगातार मुझसे शिकायत रहती है कि मैं उनकी आशाओं पर खरा नहीं उतरता, जिन्होंने मुझसे अच्छी राजनीति और स्तरीय बहस की आशा की थी।

उन्होंने मेरे पारिवारिक इतिहास का भी वर्णन किया है और कई कांग्रेस नेताओं का जिक्र किया है, जो बहुत सभ्य हैं। हालांकि मैं जेतली के गंभीर चिंतन से हैरान नहीं हूं, जो चुनाव की राजनीति में नए हैं और उनको पहले इसकी प्रेक्टिस नहीं है।
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यह गंभीरता चुनावी राजनीति के संबंध में उनमें ज्ञान की कमी से सामने आती है, क्योंकि उन्होंने मुकाबला करने की बजाय हमेशा से पिछले दरवाजे के प्रवेश को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने कभी चुनावी राजनीति की गंभीर चुनौतियों और सच्चाइयों का सामना नहीं किया, जहां उनका लोगों के सवालों से पसीना छूटने लग जाता है। वह असहज सवाल भी पूछते हैं।

वह आपकी परीक्षा लेते हैं। वह इस संदर्भ में आपकी परेशानी को समझते हैं, मगर उन्हें इसका सामना करना होगा। जेतली मुझे बताएं कि उन्होंने मुझसे क्या आशा की थी, ताकि वह मुझे एक सभ्य नेता का प्रमाण पत्र दे सकें।

मैं उन्हें बताना चाहता हूं, मुझे इसके लिए माफ कीजिए, क्योंकि कोई भी नहीं ऐसा नहीं कर सकता, खासकर जब मेरे कार्यकर्ताओं को उनके नए समर्थक मजीठिया द्वारा धमकियां दी जा रही हैं। मेरी सच को सच कहने की आदत है, जो मैं नहीं बदल सकता।

इसके लिए आपको निराश करने के लिए माफी चाहता हूं, क्योंकि मैं कुछ कहकर, कुछ और नहीं कर सकता। मेरी सलाह है जेटली जी, यह सिर्फ शुरुआत है, वह 30 अप्रैल तक आपके साथ हैं।

इससे मुझे मशहूर उर्दू कवि मीर तकी मीर के मशहूर दोहे याद आ गए हैं, इश्क-ए इबादत है रोता है क्या, आगे आगे देखिए होता है क्या।

सिद्धू; जेटली के एकलव्य
नवजोत सिद्धू के साथ जो व्यवहार किया गया है, उसने मुझे महाभारत में एकलव्य की कहानी को याद दिला दिया है, जहां गुरु द्रोणाचार्य एकलव्य का दाहिना अंगूठा गुरुदक्षिणा के रूप में मांगते हैं, ताकि वह उनके प्रिय विद्यार्थी अर्जुन को न हरा सके।
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समर्पित शिष्य के रूप में एकलव्य अपना दाहिना अंगूठा उखाड़कर उसे गुरु दक्षिणा के रूप में देने में एक पल भी नहीं लगाता।

अमृतसर में भी अरुण जेटली द्वारा अपने शिष्य नवजोत सिद्धू से गुरुदक्षिणा ली गई प्रतीत होती है, जिसने खुशी-खुशी उनको यह समर्पण कर दिया। संभवत: जेटली को बिक्रमजीत मजीठिया के रूप में एक नया शिष्य मिल गया है।
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