चंडीगढ़। हरिद्वार में गंगनहर की तेज धारा में चार नाबालिग कांवड़ियों की मौत के बाद रविवार शाम जब पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया सेक्टर-30 की गलियों में पहुंचे तो वहां सिर्फ मातम था। रोती मांओं, बिलखते परिजनों और गम में डूबे माहौल को देखकर प्रशासक भी भावुक हो उठे। कई बार उन्होंने चश्मा उतारकर आंखें पोंछीं और परिवारों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उन्हें इस दुख की घड़ी में अकेला नहीं छोड़ेगा। उन्होंने प्रत्येक पीड़ित परिवार को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
प्रशासक सबसे पहले मृतक भरत उर्फ बिट्टू के घर पहुंचे। बेटे को खो चुकी मां माधुरी का विलाप सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। माधुरी ने रोते हुए कहा कि मेरा सब कुछ चला गया...। यह सुनकर प्रशासक कुछ पल के लिए मौन हो गए। उन्होंने मां का हाथ थामकर ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिया।
इसके बाद वह पैदल ही शिवांशु और नीतिश के घर पहुंचे। दोनों परिवारों से मिलकर उन्होंने संवेदना व्यक्त की और कहा कि यह केवल चार परिवारों का नहीं, पूरे शहर का दुख है। स्थानीय पार्षद तरुणा मेहता भी उनके साथ रहीं और परिवारों की स्थिति से अवगत कराया।
कटारिया ने कहा कि हरिद्वार हादसे में जिन चार मासूम जिंदगियों का अंत हुआ, उनकी भरपाई कोई आर्थिक सहायता नहीं कर सकती। फिर भी तत्काल राहत के तौर पर राज्यपाल के विवेकाधीन कोष से प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सभी परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और ऐसे समय में प्रशासन का साथ उनके लिए जरूरी है।
प्रशासक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सहायता राशि की प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी की जाए और प्रभावित परिवारों को हर जरूरी प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की। गौरतलब है कि 31 जुलाई को हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान चार नाबालिग कांवड़िये तेज बहाव में बह गए थे, जिनकी मौत हो गई थी। शनिवार को तीन दोस्तों का अंतिम संस्कार हुआ था। पूरे सेक्टर-30 में पसरे मातम के बीच रविवार को प्रशासन की यह संवेदनात्मक मौजूदगी परिवारों के लिए कुछ पल का सहारा बनी।