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ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की बेहद कमी : रामनाथ कोविंद

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चंडीगढ़। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हम डॉक्टरों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल के इस फासले को सुधारने की आवश्यकता है। यह बात पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शुक्रवार को जीएमसीएच-32 आयोजित पहले स्नातकोत्तर दीक्षांत समारोह के दौरान कही। उन्होंने बतौर मुख्य अतिथि समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर सत्र 2001 से 2020 बैच तक के करीब 354 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर की डिग्री दी गई। इनमें तीन डीएम, 332 एमडी/एमएस और 19 क्लीनिकल साइकोलॉजी और साइकेट्रिक सोशल वर्क में एमफिल के विद्यार्थी शामिल रहे। नौ विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि के लिए पदक से सम्मानित किया। समारोह में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित, प्रशासक के सलाहकार राजीव कुमार, स्वास्थ्य विभाग सचिव अजय चगती उपस्थित रहे। समारोह में ओडिशा, जम्मू, दिल्ली सहित अन्य शहरों से विद्यार्थी डिग्री लेने के लिए पहुंचे।
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इस वर्ष पंजाब यूनिवर्सिटी ने अकादमिक स्वायत्तता में एक महत्वपूर्ण विकास को चिह्नित करते हुए जीएमसीएच को स्वतंत्र रूप से पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री प्रदान करने का विशेषाधिकार दिया। डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा होना मूल मानव अधिकार है। हमारा देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने में कामयाब रहा है लेकिन उच्च गुणवत्ता की देखभाल देने वाले सभी अस्पताल शहरों में बने हैं। देश के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवा में बहुत अंतर है। स्थिति को सुधारने की आवश्यकता है। इस समस्या को हल किए बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। इसके साथ कोविंद ने बुद्धिमता के साथ डॉक्टरों में करुणा होने को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि वह मरीज को सिर्फ एक मेडिकल केस की तरह न देखें बल्कि पूर्ण मानव की तरह देखें।
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