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Chandigarh: विलुप्त हो चुके 'जल्ली' नृत्य की चंडीगढ़ में होगी प्रस्तुति, डॉ. नरिंदर निंदी ने की रिसर्च

Thu, 13 Jun 2024 04:12 PM IST
निवेदिता वर्मा नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

जल्ली नाच मुसलमानी फकीरों खासकर मलंगों का नाच है। यह पुरातन समय में पाकिस्तानी पंजाब में नृत्य किया जाता था। इसमें नृत्य करनेवाले हाथ में एक डंडा पकड़ते हैं। डंडा को मुतायर कहा जाता था। उसको पकड़कर नाचते थे।
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theatre - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पुरातन समय में पाकिस्तानी पंजाब में होनेवाली नाच जल्ली का प्रदर्शन टैगोर थिएटर में 22 जून को होगा। यह नाच अलोप हो गया था। इसे सेक्टर 51 के रहनेवाले डॉ. नरिंदर निंदी ने रिसर्च कर खोजा है। उनहोंने पंजाब दे लोकनाचां दा सर्वेखन नाम से एक किताब लिखी है। उस किताब में इस विलुप्त हुए नाच का जिक्र है। यह जल्ली नाच डॉ नरिंदर निंदी के निर्देशन में हो रहा है। इसके लिए टैगोर थिएटर में रिहर्सल चल रही है। यह नाच नाटक चिड़िया घर के मंचन के दैरान प्रस्तुत किया जाएगा।

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डॉ नरिंदर निंदी ने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि पंजाब के पुरातन समय में अलग अलग क्षेत्रों में नाचने वाले कबायली नाच थे। उनका खोजात्मक सर्वेक्षण पेश किया गया है। उसमें से एक जल्ली नृत्य भी है। जल्ली का शब्दिक अर्थ झूमना। प्रभु, अल्लाह या भगवान की मस्ती में झूमना। दुनियावी झंझटों से दूर होकर अल्लाह की मस्ती में झूमना।

पुरातन समय में पाकिस्तानी पंजाब में होता था यह नाच...
यह नाच मुसलमानी फकीरों खासकर मलंगों का नाच है। यह पुरातन समय में पाकिस्तानी पंजाब में नृत्य किया जाता था। इसमें नृत्य करनेवाले हाथ में एक डंडा पकड़ते हैं। डंडा को मुतायर कहा जाता था। उसको पकड़कर नाचते थे।
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समय के साथ यह नाच अलोप या विलुप्त हो गया। मलंगों और फकीरों का जत्था मस्ती में नाचता था। समय की मुद्राएं अलोप हो गई। इसको रिसर्च कर पहली बार टैगोर के मंच पर पेश किया जा रहा है।

यह है इस नाच का वेशभूषा ...
इस नाच का वेशभूषा में प्रस्तुति देनेवाले कलाकार काला कपड़ा पहनते थे। चादर और कुर्ता पहन सकते हैं। इस नाच को औरत और मर्द दोनों ही करते हैं। पैरों में घुंघरू और हाथों में खड़ताल पकड़कर और मर्द हाथ में डंडा पकड़कर नाचते हैं। मर्द भी पैरों में घुंघरू बांधते हैं। इस नृत्य की पृष्ठभूमि में सूफियाना कलाम पेश किया जाता है। इसमें तेरे मैनू इश्क नचाया कर थैय्या थैय्या, इश्क दी नवीयों नवी बहार...दमादम मस्त कलंदर अली दा पहला नंबर जैसे गीत पेश होंगे।

नाटक चिड़ियाघर का रिहर्सल जारी....
सेक्टर 18 के टैगोर थिएटर में 22 जून को नाटक चिड़िया घर का मंचन होगा। इस नाटक का लेखन और निर्देशन मलकीयत सिंह मलंगा ने किया है। मलकीयत सिंह मलंगा ने बताया कि डेढ़ घंटे के इस नाटक में 16 कलाकार हैं। इसमें 18 वर्ष से लेकर 50 वर्ष के कलाकार है। यह हास्य नाटक है। इसमें दो परिवारों की कहानी को दिखाया गया है। इस नाटक में दिखाया गया है कि इन दो घरों में जो भी लोग आ रहे हैं वे टाइम पास करने के लिए आ रहे हैं। 

नाटक में दिखाया गया कि फिल्म के निर्देशक और प्रोड्यूसर आते हैं। मंत्री और नेता आते हैं। वे सभी को झूठे सब्जबाग दिखाते हैं। अपनी टीआरपी के लिए किस प्रकार से रील बना रहे हैं। भंगडा के नाम पर किस प्रकार लोक नाच को बर्बाद कर रहे हैं। बेरोजगारी के नाम पर किस प्रकार लोग अनैतिक काम जिसमें गैंगस्टर बन रहे हैं। नाटक में यह भी है कि लोग अपनी संस्कृति को किस प्रकार भूलते जा रहे हैं। हिंदी या पंजाबी खत्म होती जा रही है। नाटक में सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष है। यह हास्य भरपूर है। इस नाटक का संदेश है कि हमारी संस्कृति अमीर बनी रहे।

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