पंजाब में ड्रग्स के फैले जाल का प्रमुख कारण इससे होने वाली मोटी कमाई है। इसका लालच देकर प्रदेश के नौजवानों को बड़े तस्कर भरमा लेते हैं, जिसके बाद वे गली-मोहल्लों में ड्रग्स के सप्लायर बन जाते हैं।
पुलिस के अनुसार, पाकिस्तान से पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमाओं के जरिए स्मगल होकर आती हेरोइन कस्बों और छोटे-बड़े शहरों से होते हुए महानगरों में पहुंचती हैं। इससे आगे यह विभिन्न नेटवर्कों के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंडी में पहुंचती हैं।
इस सप्लाई चेन के विभिन्न पड़ावों पर इसकी कीमत कई गुणा बढ़ जाती है। पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारत में प्रवेश करने वाली ड्रग्स की अंतिम सप्लाई उत्तरी अमेरिका एवं यूरोप की मंडियों में होती है। इस वक्त पंजाब पुलिस हेरोइन प्राप्ति की विभिन्न कड़ियों की पहचान करने में जुटी हुई है।
पाक से पंजाब पहुंचकर हेरोइन की कीमत हो जाती है दोगुनी
पंजाब के आईजी (काउंटर इंटेलिजेंस) गौरव यादव के अनुसार, पाकिस्तान से चलने के बाद भारत की सीमा में प्रवेश करते ही हेरोइन की कीमत दोगुनी हो जाती है। दिल्ली पहुंचने तक यह तीन से पांच गुणा, मुंबई पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत में पांच से 10 गुणा हो जाती है। अंत में यह उत्तरी अमेरिका एवं यूरोप पहुंचती है, जहां अंतरराष्ट्रीय मंडी में इसके मूल्य में भारी बढ़ोतरी होती है।
पंजाब में एक ग्राम हेरोइन की कीमत 2000 रुपये है, जो शहरी क्षेत्रों में अमीर ग्राहकों की एक दिन की डोज है। पक्के नशेड़ी हर रोज 2 से 3 ग्राम की खपत करते हैं, जबकि इससे कहीं अधिक की सप्लाई दिल्ली-मुंबई के जरिए विदेशी मंडियों में होती है। इस प्रकार भारी-भरकम कमाई का लालच हेरोइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए पंजाब में प्रवेश करवाता है और अपने अगले पड़ाव तक पहुंचने से पहले यह पंजाब के भी कई घरों का बर्बाद कर जाती है।
अफगानिस्तानियों से नाइजीरियनों तक जुड़े हैं तार
ड्रग तस्करी के तार अफगानिस्तानियों से लेकर नाइजीरियनों तक जुड़े हैं। ड्रग्स के खिलाफ पंजाब पुलिस द्वारा चलाई गई मुहिम में सामने आया है कि इस कड़ी में अफगानस्तिानी, पाकिस्तानी, श्रीलंकाई व नाइजीरियनों का एक समूह सक्रिय है।
यह सप्लाई चेन भारत के अलग-अलग स्थानों पर मौजूद छोटे--छोटे ड्रग पेडलरों के संपर्क में है तथा ‘नशे से नाश’ का कारोबार चला रही है। इसकी समाप्ति के लिए पंजाब पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस के भी संपर्क में है।