खास बात यह भी है कि सरकार ने मुख्य सचिव से टैक्सेशन विभाग वापस लेने में इतनी जल्दी दिखाई है कि ए. वेणुगोपाल जोकि 20 मई, 2020 तक अवकाश पर चल रहे हैं, को यह जिम्मा सौंपने के साथ ही उनके ड्यूटी पर लौटने तक वित्त कमिश्नर टैक्सेशन का कामकाज अनिरुद्ध तिवारी को संभालने को कहा है। तिवारी इस समय प्रिंसिपल सेक्रेटरी फाइनेंस हैं और प्रिंसिपल सेक्रेटरी न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी रिसोर्सेस का अतिरिक्त जिम्मा संभाल रहे हैं।
मुख्य सचिव और कैबिनेट मंत्रियों के बीच विवाद की मुख्य वजह एक्साइज पॉलिसी है। आरोप है कि राज्य में शराब के कारोबार से मुख्य सचिव के करीबी लोग भी जुड़े हैं और कारोबारियों के हितों के अनुसार मुख्य सचिव नई एक्साइज पॉलिसी पर मंत्रियों की मुहर लगवाना चाहते थे। मंगलवार को करन अवतार सिंह से टैक्सेशन विभाग वापस लेने के फैसले को सरकार द्वारा उनके पर कतरने के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों ने मुख्य सचिव के खिलाफ मुख्यमंत्री पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
मुख्यमंत्री भी अपने कैबिनेट सहयोगियों को नाराज करने का जोखिम उठाने के मूड में नहीं हैं। फिलहाल कैबिनेट सचिव का सारा जिम्मा करन अवतार सिंह के बजाय सतीश चंद्रा को सौंप दिया गया है, जिससे माना जा रहा है कि जल्द ही मुख्य सचिव के पद पर कोई नया चेहरा दिखाई देगा।
वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने मंगलवार के घटनाक्रम के बावजूद साफ कर दिया है कि वे भविष्य में उनके (करन अवतार सिंह) साथ काम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वे अपने स्टैंड पर कायम हैं क्योंकि मुख्य सचिव का रवैया ऐसा है कि उन्हें न तो जनता की और न ही मंत्रियों की कोई परवाह है।
वे अपनी मनमर्जी की पॉलिसी राज्य में लागू करवाना चाहते हैं, जो हमें मंजूर नहीं है। अब तक जितनी भी आबकारी नीतियां लागू की गई हैं, उससे साल दर साल राज्य सरकार को नुकसान हो रहा है। तीन साल में 3000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। ऐसे अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है। आखिरकार जनता को जवाब तो हमें देना है।
घमंडी अफसर बर्दाश्त नहीं: चन्नी
कैबिनेट मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी का कहना है कि करन अवतार सिंह जैसा घमंडी अफसर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले में हम सभी मंत्री एकजुट हैं। मुख्य सचिव के साथ अब और काम करना मुश्किल है। उन्होंने ऐसे हालात बना दिए हैं कि किसी भी विभाग के लिए बनने वाली नीतियों पर अंतिम फैसला अफसर ही ले सकते हैं। जबकि ऐसे अफसर कभी फील्ड में नहीं गए, जहां उन्हें यह पता चलता कि आम लोगों को क्या जरूरतें हैं। उपयुक्त होगा कि सभी पॉलिसी में अफसरों की जिम्मेदारी भी तय हो और सरकार को इससे होने वाले नफा-नुकसान के लिए अफसरों को जवाबदेह बनाया जाए। करन अवतार सिंह के मामले में मुख्यमंत्री को जल्द फैसला लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री करन अवतार को तुरंत पद से हटाएं: राजा वडिंग
कांग्रेसी विधायक अमरिंदर राजा वडिंग ने कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत एक्शन लेते हुए करन अवतार सिंह को मुख्य सचिव पद से हटाना चाहिए। बल्कि अच्छा होगा अगर करन अवतार अब खुद ही मुख्य सचिव का पद छोड़ दें क्योंकि उनके साथ सरकार का कोई मंत्री काम करने को तैयार नहीं है। अजीब बात है कि इतनी फजीहत होने के बाद भी मुख्य सचिव का अब तक कोई स्पष्टीकरण तक नहीं आया है।