चंडीगढ़। जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना... गाने की इन पंक्तियां को पंजाब यूनिवर्सिटी के गणित विभाग की चेतना (21) चरितार्थ कर रहीं हैं। विल्मस ट्यूमर (बच्चों की किडनी में होने वाला कैंसर) की चौथी स्टेज से पीड़ित चेतना से न केवल उनके दोस्त बल्कि हॉस्टल की वार्डन से लेकर लड़कियां प्रेरणा ले रहीं हैं। उनकी सकारात्मक सोच हॉस्टल में नई उमंग से भर देती है। पढ़ने का शौक ऐसा कि गणित में 80 में से 80 अंक हासिल किए। चेतना विश्वविद्यालय के छात्रों को पढ़ाने के साथ उनमें देशभक्ति भी जागृत कर रही हैं।
बठिंडा निवासी छात्रा चेतना गर्ल्स हॉस्टल नंबर 6 में रहती हैं। और पीयू के लिए एक उम्मीद की मशाल बनी हुई हैं। वार्डन और गणित की प्रोफेसर डॉ. मनीषा ने बताया कि वह खुद हौसले और जज्बे से प्रेरणा लेती हैं। वह कक्षा की हर गतिविधि और हॉस्टल के कार्यक्रम में शामिल होती हैं। कक्षा में भी चेतना काफी सहयोग की भावना रखती हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने के बावजूद पूरे उत्साह के साथ जीने की चाह दुनिया के न जाने कितने लोगों में हौसला भरती हैं।
बास्केटबॉल की प्लेयर को कैंसर सुन खिसक गई पैरों तले जमीन
चेतना के पिता भूषण अग्रवाल ने बताया कि वैसे तो विल्मस ट्यूमर का बच्चों में पांच साल की उम्र पता चल जाता है, लेकिन चेतना के केस में उन्हें 17 साल पता चला। पेट दर्द होने पर जब अस्पताल में दिखाया तब पता चला कि चौथी स्टेज का कैंसर है। चेतना को देखकर कभी लगा नहीं था कि उसे कैंसर होगा। आम दिनों में वह बास्केटबॉल की राज्य स्तर की प्लेयर थी। इसके साथ ही 12वीं तक नियमित 20-22 किलोमीटर साइक्लिंग करती थी।
12वीं में टॉप किया, प्रिंसिपल ने फोटो मांगा, सपनों को लगे पंख
भूषण अग्रवाल ने बताया कि कैंसर के कारण चेतना को 12वीं ड्रॉप करनी पड़ी, लेकिन अगले ही साल 12वीं नॉन मेडिकल में 96 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण की। जिस दिन परीक्षा परिणाम आया दिल्ली में चेतना की कीमोथैरेपी चल रही थी। प्रिंसिपल ने बताया कि चेतना ने टॉप किया है उसकी फोटो चाहिए। उस पल चेतना के हौसले को देखकर आंखें भर आईं। चेतना ने घर रहने की बजाय हॉस्टल में रहकर बीएससी गणित से करने की इच्छा जाहिर की। जब पीयू हॉस्टल में चेतना को छोड़ने आए थे तो डर था कि वह कैसे रहेगी। योग और बेहतर खानपान से वह खुद को स्वस्थ रखती है।