पंजाब विश्वविद्यालय ने शनिवार को पांचवी ग्लोबल एलुमनाई मीट का आयोजन किया जिसमें देश-विदेश से कई पूर्व छात्र पहुंचे। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने समारोह की अध्यक्षता की और पूर्व छात्रों से अपने संस्थान के विकास के प्रति योगदान की अपील की।
संसद के शीतकालीन सत्र समाप्त होने के अगले दिन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने चंडीगढ़ में विपक्ष इंडिया ब्लॉक के विरोध का करारा जवाब दिया। धनखड़ बोले कि मैं तो ऐसे वर्ग से आता हूं कि हमें चुनौती देते समय सब इकट्ठे हो जाते हैं, कोई सोचता नहीं, लेकिन मुझे इसकी आदत हो गई है। हमें तो चोंच में पानी लेकर आग बुझानी है।
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उपराष्ट्रपति धनखड़ ने शनिवार को पंजाब यूनिवर्सिटी की पांचवीं ग्लोबल एलुमनी में शिरकत की। उनके भाषण के दौरान किसी का फोन बजने पर उन्होंने समारोह में गंभीरता और अनुशासन का पालन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आप को हैरानी होगी कि यहां देश के उपराष्ट्रपति उन्हें लेक्चर दे रहे हैं, जो कल तक राज्यसभा की अध्यक्षता कर रहे थे जहां उन्होंने उपद्रव और व्यवधान को देखा।
उपराष्ट्रपति फिर बोले कि मेरी चोंच का पानी कम हो सकता है लेकिन इतिहास में मेरा नाम लिखा जाएगा। यह पंक्ति उन्होंने समारोह में उपस्थित गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की चिड़िया और बंदर की कहानी को लेकर कही, जिसमें राज्यपाल ने बताया कि कैसे बंदर चिड़िया के घर में आग लगा देता है और वह चोंच में पानी भर कर उसे बुझाने की कोशिश करती है और कहती है कि इतिहास में उसका नाम आग बुझाने के लिए लिखा जाएगा और बंदर का आग लगाने के लिए।
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धनखड़ ने एक बार नहीं बल्कि कई बार विपक्ष पर इशारों-इशारों में तंज कसा। उन्होंने राष्ट्रवाद के सिद्धांत को सबसे ऊपर रखने की बात कही और बोले कि राष्ट्रवाद और विकास की कीमत पर राजनीति नहीं की जा सकती। हम ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकते जो देश की प्रगति के प्रति भी नकारात्मक विचार रखते हैं। ‘मैं संसद में अनुशासन और मर्यादा देखने की उम्मीद करता हूं’, इन पंक्तियों के साथ उपराष्ट्रपति ने अपने 44 मिनट के भाषण को विराम दिया।
एलुमनाई से पीयू में अपने अनुभव देने की अपील
धनखड़ ने पूर्व छात्रों से उनके संसाधनों का पूर्ण प्रयोग करने पर प्रश्न किया और कहा कि देश आज आजादी के 100 साल पूरे होने में आखिरी क्वार्टर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पूर्व छात्र अपने प्रतिष्ठित संस्थान के प्रति योगदान देने का कठोर संकल्प लें। हारवर्ड यूनिवर्सिटी के एलुमनाई द्वारा 2024 में दिए 53 बिलियन एनडोमेंट फंड 120 देशों के जीडीपी से अधिक है। एंडोमेंट फंड संस्थान और पूर्व छात्रों के बीच घनिष्ठ संबंध विकसित कर रहा है। कॉर्पोरेट से वह बहुत अधिक फंड की मांग नहीं कर रहे हैं बस चोंच का पानी पूंछ की आग बुझाने में प्रयोग करने जितना कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने आचार्य देवव्रत की सुनाई चिड़िया के चोंच में पानी लेकर आग बुझाने के दृण संकल्प को लेकर बात कही। देश को विकसित बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का रोल अहम बताया और इसके लिए पूर्व छात्रों को अपना ज्ञान या वित्तीय सहायता से मदद करने की अपील की।
पूर्व राज्यपाल रहे डॉ. केके पाॅल बोले पीयू की हवाओं में रोमांस
पूर्व राज्यपाल डॉ. केके पॉल और शेखर गुप्ता ने पीयू में बिताए समय को याद करते हुए कहा कि यहां की हवाओं में रोमांस है। दोनों ने पीयू से पढ़ाई की और इनके जीवनसाथी से भी इनकी मुलाकात यहीं हुई। शेखर गुप्ता ने बताया उन्होंने 1976 में डिपार्टमेंट ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की। इस दौरान में वह अपनी पत्नी से मिले जो बायोफिजिक्स से एमएससी कर रही थीं। उस दौरान पत्रकारिता से अधिक कमाई न हो पाने से उन्होंने पीयू के अर्थशास्त्र विभाग में जाली दाखिला लिया और दो साल हॉस्टल नंबर छह में रहे। सेवानिवृत्त आईपीएस अतुल करवाल ने बताया कि वह पीयू आने से पहले खाने को लेकर बड़े चूजी थे लेकिन यूनिवर्सिटी आकर उन्हें हॉस्टल में रहकर उनकी यह आदत टूट गई और जो मिलता था वह खा लेते थे।
80 वर्षीय प्रो. कुलदीप सिंह ढींढसा के लिए उपराष्ट्रपति ने रोका भाषण
80 वर्षीय प्रो. कुलदीप सिंह ढींढसा ने लॉ सभागार में प्रवेश किया तो सभी सीटें फुल थी और उपराष्ट्रपति ने अपना भाषण देना शुरू किया था। उन्हें आता देख उपराष्ट्रपति ने पोडियम पर से कहा कि पहले उन्हें बैठने देते हैं। फिर उनके लिए सीट उपलब्ध करवाने के लिए कहा। प्राे. ढ़ींढसा ने 1962 में पीयू में एमएससी केमिस्ट्री ऑनर्स में दाखिला लिया और 71 में संस्थान से पीएचडी पूरी की। कुरुक्षेत्र से वह एलुमनाई मीट में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे और बताया कि अभी तक उनका कोई क्लासमेट उन्हें यहां नहीं दिखा।
तीनों बेटियों समेत मां ने भी की पीयू से डिग्री
75 साल की उम्र में सत्र 2023 में हिंदी पीएचडी की डिग्री करने वालीं डॉ. दर्शना अपने पति के साथ एलुमनाई मीट पहुंची। उन्होंने बताया उनकी तीनों बेटियों ने परिसर से पढ़ाई की। संगीता सोनिक ने एमए अंग्रेजी, अमृता ने एमए अर्थशास्त्र और संचिता ने राजनीतिक शास्त्र में एमए की। बेटियों समारोह में नहीं आ सकीं लेकिन वह आ गईं।
अंतिम परीक्षा के बाद दोस्त ले गए थे शराब पिलाने
सेवानिवृत आईएएस रमेश चंद्रन नय्यर ने बताया कि उन्होंने 1974 में पीयू से स्टेटिसटिक्स विभाग से मास्टर्स की। वह उस समय शराब नहीं पीते थे लेकिन आखिरी पेपर के दिन दोस्त जबरदस्ती शराब पिलाने ले गए। उस दौरान दो अन्य छात्रों की एलएसडी नशा करने से मृत्यु हो गई जिन्हें वह अपने कंधों पर उठाकर पीजीआई लेकर गए थे। जीवन का वह एक पाठ था जिसे वह आज तक नहीं भूले और कभी भी नशे न करने का प्रण लिया।
रैगिंग करने आए सीनियर की कर दी थी पिटाई
सेक्टर 26 स्थित एसजीजीएस कॉलेज के प्राचार्य व पीयू के 1974 बैच के पूर्व हरजीत सिंह सोही ने बताया उस दौरान सीनियर हॉस्टलों में रैगिंग लिया करते थे। उनके वॉर्डन आरडी सियाल ने कहा था कि कोई रैगिंग करे तो ओनू फड़ के कुट्टो। वह गणित विभाग में दाखिला लेकर नए-नए आए थे जब कुछ सीनियर उनके दरवाजे पर रैगिंग करने आए, इस पर उन्होंने अलमारी से डंडा निकाल कर उन्हें कूट दिया। सीनियर ने उनकी वॉर्डन से भी शिकायत लगाई। सोही बोले हॉस्टज में बड़ी मस्ती किया करते थे।