चंडीगढ़। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर पीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग ने ओपीडी स्थित लिवर क्लिनिक में वायरल हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग और जागरूकता शिविर का आयोजन किया। मरीजों के तीमारदारों को वायरल हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें वायरल हेपेटाइटिस, फैलने के रूट और बचाव के तरीकों की जानकारी दी गई। यह एक्टिविटी पूरे सप्ताह जारी रहेगी।
हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अजय दुसेजा ने बताया कि पीजीआई के आउट पेशेंट लिवर क्लिनिक में हर साल क्रोनिक वायरल हेपेटाइटिस के लगभग 800-1000 मरीज देखे जाते हैं, जिन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से रेफर किया जाता है।
अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुनील तनेजा ने कहा कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग के कारण पंजाब हेपेटाइटिस सी के लिए ज्यादा मामलों वाला राज्य है। पंजाब हेपेटाइटिस सी के खिलाफ लड़ने में भी सबसे आगे रहा है। हब और स्पोक ईसीएचओ मॉडल का उपयोग करके इलाज करने के इसके दृष्टिकोण को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर दोहराया गया है, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी ध्यान आकर्षित किया है। इस वर्ष का विषय हेपेटाइटिस: आइए इसे जड़ से खत्म करें है।
हेपेटाइटिस से लिवर में होती है सूजन
हेपेटाइटिस बीमारियों का एक समूह है जो हमारे लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। हेपेटाइटिस से लिवर में सूजन आ जाती है। लिवर प्रोटीन का उत्पादन और पाचन में सहायता करने समेत सैकड़ों आवश्यक कार्य करता है। जब लिवर हेपेटाइटिस से क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो इसके सामान्य कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
वायरल हेपेटाइटिस मुख्य रूप से हेपेटाइटिस ए, बी, सी और ई वायरस के कारण होता है। हेपेटाइटिस ए और ई दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं। इससे तीव्र पीलिया होता है जो आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है। दूसरी ओर हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी के विषाणु संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलते हैं, जिसमें असुरक्षित यौन संबंध और इंजेक्शन शामिल हैं।
बचाव के उपाय
वायरल हेपेटाइटिस को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए हेपेटाइटिस ए और बी के टीके सुरक्षित और अत्यधिक प्रभावी हैं।
नवजात शिशुओं को मां से बच्चे में संक्रमण को रोकने के लिए जन्म के 24 घंटों के भीतर हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना चाहिए। हेपेटाइटिस के लिए टीका लगवाने की जरूरत है या नहीं, इसके लिए डॉक्टर की सलाह लें।
शौचालय का उपयोग करने के बाद और खाना बनाने से पहले हमेशा अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं। भोजन ठीक से पका हुआ हो।
पीने का पानी फिल्टर किया हुआ या पर्याप्त रूप से उबला हुआ होना चाहिए। खाने-पीने की चीजों को ढककर और मक्खियों से दूर रखना चाहिए। नशीली दवाओं के दुरुपयोग से बचें। टैटू बनवाने में और शेविंग के दौरान नई सुइयों और रेजर का प्रयोग करें।