फांसी की सजा सुनाते ही दोषी को एकांत कारावास में रखने के प्रावधान को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने औपनिवेशिक मानसिकता करार देते हुए इस प्रावधान को समाप्त करने के हरियाणा सरकार को आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मौत की सजा पाने वाले के भी संवैधानिक अधिकार होते हैं और उसके मानवीय अधिकारों का हनन करने की किसी को भी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
हरियाणा ने पंजाब के जेल मैनुअल को अपनाया है, इसलिए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को भी इसमें संशोधन पर गौर करने के आदेश दिए हैं। याचिका पर अपना आदेश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फांसी का इंतजार करने वाले को सजा सुनाने से फांसी या बरी होने तक अकेला रखने से आखिर क्या हासिल होगा।
कोर्ट ने कहा कि सजा के बाद अपील और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में वर्षों का समय लग जाता है और ऐसे में दिन में 23 घंटे काल कोठरी में सबसे अलग रखना न केवल अराजक, निर्दयी बल्कि क्रूर प्रावधान है। अकेले रखने की अधिकतम अवधि फांसी से पहले अधिकतम 2 से 3 दिन होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि भले ही किसी को मौत की सजा मिली हो लेकिन इस आधार पर मानवीय अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जा सकता और ऐसे में सजा मिलने से फांसी या बरी होने तक एकांत कारावास असंवैधानिक है।