प्राचीन कला केंद्र में सनहिता नंदी ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति से सबका मन जीत लिया।
सेक्टर-35 के भास्कर राव सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सनहिता ने अपनी अछूती प्रस्तुति दी। यह सुरमई शाम सबको लुभा गई।
सनहिता नंदी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रगतिशील गायिका हैं। उन्होंने बचपन से संगीत सीखना शुरू कर दिया था। पंडित ए कानन और पंडित विनायक तोखी से संगीत की बारीकियां सीखीं।
सनहिता ने कला जगत में अब अपनी खास पहचान बना ली। सनहिता ने किराना घराना की बारीकियों को गहराई से सीखा और किराना घराने के बेहद मुश्किल रागों को बेहद संजीदगी से पेश किया।
सनहिता ने अपने गायन की शुरुआत राग पूरिया धनाश्री से की। अलाप के बाद विलंबित एक ताल में रचना....अब तो रुतमन...पर जैसे ही उन्होंने अपने सुर बिखेरे, श्रोता सहज ही उनके गायन से जुड़ते चले गए।
इसके बाद सनहिता ने छोटा ख्याल में तीन ताल से निबद्घ रचना पायलिया झंकार मोरी पेश की। उसके बाद सहाना झपताल में एक रचना गुंदलारी मालन फूल की हारवा पेश करके वाहवाही लूटी।
कार्यक्रम का समापन सनहिता ने राज बागेश्री की रचना प्रीति लगली बलमा और नहीं घर आए बलमा से किया। उनके साथ तबले पर सिटी के युवा और प्रतिभाशाली कलाकार अर्विभाव ने संगत की।
हारमोनियम पर मुरलीधर सोनी ने उनका साथ दिया। केंद्र की रजिस्ट्रार शोभा कौसर ने कलाकारों को इस मौके पर सम्मानित किया।