चंडीगढ़। सर्जरी में एआई का दखल बढ़ रहा है, लेकिन एक कुशल सर्जन की असली पहचान सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि गुरु की सीख से बनती है। एआई तकनीक सीखने, अभ्यास करने और मरीज की स्थिति समझने में मदद कर सकती है, लेकिन साहस, संवेदना, नैतिकता और सही निर्णय लेने की क्षमता डॉक्टर के भीतर शिक्षक ही विकसित कर सकता है। पीजीआई में आयोजित छठे प्रो. बीएल तलवार स्मृति व्याख्यान में इसी बात पर जोर दिया गया।
हैदराबाद के किम्स अस्पताल के डॉ. आरए शास्त्री ने द टीचर लाइव्स ऑन विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने प्रो. बीएल तलवार के साथ अपने अनुभव बताते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में काम करना और चुनौतीपूर्ण समय में सही फैसला लेना उन्होंने अपने गुरु से सीखा।
डॉ. शास्त्री ने कहा कि एआई सर्जरी की तकनीक में सहायक हो सकती है, लेकिन इसे शिक्षक का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। तकनीक हाथ का मार्गदर्शन कर सकती है, पर सर्जन को गढ़ने का काम शिक्षक ही करता है।
पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि संस्थान की उपलब्धियों में पुराने शिक्षकों और सर्जनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने प्रो. तलवार की सादगी, मरीजों के प्रति समर्पण और विद्यार्थियों को सिखाने की भावना को याद किया।