तलाक के बाद भले ही पत्नी की आय अधिक हो और वह बच्चों का भरण पोषण करने में सक्षम हो तो भी पति को उसे इसके लिए योगदान करना होगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदाबाद निवासी व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश जारी किए हैं।
पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद के बाद फैमिली कोर्ट ने तलाक को मंजूरी देते हुए देते हुए पति को आदेश दिए थे कि वह तलाक के बाद अपने तीनों बच्चों को 4-4 हजार रुपये प्रतिमाह मेन्टेन्स के तौर पर देगा।
तीनों ही बच्चे तलाक के बाद अपनी मां के साथ रह रहे हैं और फैमिली कोर्ट के इस फैसले को पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे दी थी।
पति का कहना था कि उसकी पत्नी की आय काफी अधिक है और वह आसानी से तीनों बच्चों की देखभाल कर सकती है ऐसे में उस पर तीनों बच्चों के लिए प्रतिमाह 4-4 हजार रुपये मेन्टेन्स दिए जाने का आदेश सही नहीं है और यह राशि कम की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने पति और पत्नी दोनों की आय का आंकलन कर कहा कि पति की भी मासिक आय कम नहीं है वह प्रतिमाह 40 से 50 हजार रुपये कमा रहा है और बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी सिर्फ एक पर नहीं डाली जा सकती है।
जहां तक बच्चों की परवरिश और उनके खर्च का सवाल है तो इसे पति और पत्नी दोनों को ही उठाना होगा। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि पत्नी की आय चाहे ज्यादा भी क्यों न हो तलाक के बाद बच्चों की मेन्टेन्स के खर्च से पति बच नहीं सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेशों पर मोहर लगा दी है।