पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के लिए तीन टीमें गठित की हैं। ये टीमें हरियाणा और पंजाब में छापे मार रही हैं। सीसीटीवी फुटेज देखने से पता चला है कि हमले को अंजाम देने के बाद दोनों बाइक से ही मोहाली और फिर एयरपोर्ट रोड से होते हुए आगे निकल गए। मंगलवार देर रात तक टीमें मोहाली में आरोपियों की मूवमेंट को फॉलो करते हुए चंडीगढ़ से सेक्टर-47 रोड से होते हुए चंडीगढ़ के लाइट पॉइंट और चौराहों के कैमरे खंगालते हुए मोहाली के रास्ते से होकर एयरपोर्ट रोड पर आइशर लाइट पॉइंट तक गई, जहां तक आरोपी कैमरे में दिखाई दिए। आइशर लाइट पॉइंट के पास लगे एक घर के बाहर कैमरे में आरोपी देखे गए, लेकिन इसके बाद वह मोहाली एयरपोर्ट चौक की तरफ भाग गए। यह भी कहा जा रहा है कि आरोपी हेलमेट पहने और शाॅल ओढ़े हुए थे और वह बहुत तेज रफ्तार से बाइक चला रहे थे। पुलिस ने इस रोड से सीधे जाकर हाइवे से राइट होकर आने वाले टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे चेक किए तो उसमें कोई नजर नहीं आया। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि आरोपी या तो एयरपोर्ट चौक से राइट होकर लांडरा रोड की ओर फरार हो गए या फिर आसपास के किसी गांव में घुस गए हैं।
सोशल मीडिया से पोस्ट किया डिलीट
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली गई थी, जिसमें लिखा गया कि लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप के गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा ने इस घटना को अंजाम दिलवाया है। इस पोस्ट को कुछ ही मिनट में डिलीट कर दिया गया। पुलिस पता लगा रही है कि यह पोस्ट कब, किसने, कहां से अपलोड की थी।
क्लब संचालकों और बाउंसरों से पूछताछ कर रही पुलिस
पुलिस शहर के अन्य क्लब संचालकों से भी बातचीत कर रही है। उनसे पूछ रही है कि उनसे भी प्रोटेक्शन मनी तो नहीं मांगी जा रही। पुलिस क्लब संचालकों के अलावा क्लब के बाउंसरों से पूछताछ कर रही है। यह पता लगा रही है कि कहीं यह एक्सटॉर्शन का मामला तो नहीं। इसके अलावा पुलिस डंप डाटा उठाकर जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि यह हकीकत में एक्सटॉर्शन का मामला भी निकल सकता हैं, क्योंकि इससे पहले कई क्लब संचालकों को रंगदारी के लिए कॉल आ चुकी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
तीन महीने में दूसरी बार चंडीगढ़ में बम धमाके होने से पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासतौर पर उस समय जब पांच दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा प्रस्तावित है। तीन दिसंबर को पेक में उनका कार्यक्रम निर्धारित है, मगर उससे पहले ही सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।