चंडीगढ़। सेक्टर-32डी स्थित पीजी में हुए अग्निकांड के बाद एस्टेट ऑफिस की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि एस्टेट ऑफिस के अंतर्गत आने वाले सभी उपनिरीक्षक 10 से 25 वर्षों से एक ही विंग का काम देख रहे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद ऊंची पहुंच के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
बता दें कि चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस के पास 70 हजार से अधिक संपत्तियाें का ब्योरा दर्ज है। इनमें कुछ व्यवसायिक और कुछ आवासीय संपत्तियां हैं। वर्तमान में इन संपत्तियों में वायलेशन को लेकर 11 उपनिरीक्षकों की तैनाती की गई है। इनमें से 8 को शहर में फील्ड की जिम्मेदारी दी गई है जबकि 3 को कार्यालय कार्यों के लिए रखा गया है। हैरानी वाला पहलू यह है कि यह सभी उपनिरीक्षक अपनी-अपनी विंग में बीते 10 से 25 सालों से जमे हुए हैं। कई बार अधिकारियों द्वारा इनके स्थानांतरण का प्रयास भी किया गया, लेकिन कुछ दिन अन्य विंग में रहने के बाद ये फिर से पुरानी विंग में तबादला करा लेते हैं। मार्च से पहले ही दो उपनिरीक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
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एक उपनिरीक्षक खुद चला रहे पीजी, कर रखा है वायलेशन
एस्टेट ऑफिस में तैनात एक वरिष्ठ उपनिरीक्षक खुद पीजी संचालित कर रहे हैं। हालांकि पीजी संचालन के लिए परमीशन ली गई है लेकिन बिल्डिंग में कई जगह अतिक्रमण किया गया है। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन कार्रवाई वही जस की तस।
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कोट
व्यापक फेरबदल किया जाएगा
कौन उपनिरीक्षक कितने समय से अपनी विंग में तैनात है, इसकी मुझे पूरी जानकारी नहीं है। वह इस मामले की जानकारी लेकर व्यापक स्तर पर फेरबदल किया जाएगा। यदि किसी उपनिरीक्षक ने बिल्डिंग वायलेशन कर रखा है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-मनीष लोहान, असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर, चंडीगढ़