नेशनल काउंसिल ऑफ एजूकेशन एंड रिसर्च ट्रेनिंग(एनसीईआरटी) की ग्याहरवीं और वाहरवीं कक्षा की बायोलॉजी टैक्सबुक में गलतियों का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया है।
वीरवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने मामले पर एनसीईआरटी के काउंसिल को कड़ी फटकार लगाई।
हाईकोर्ट ने एनसीईआरटी के सुस्त रवैये पर हैरानी व्यक्त की। गिरती एजूकेशन क्वालिटी पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एनसीआरटी के तीन महीने की मोहलत देने के आग्रह को भी ठुकरा दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला गंभीर है, लिहाजा एक महीने में यह गलतियां दूर करके याचिकाकर्ता का सूचित किया जाए, ताकि हाईकोर्ट को इस संबंध में जानकारी मिल सके।
यह मामला पंजाब युनिवर्सिटी के बायोलॉजी विभाग के प्रोफसर डॉ. अरविंद गोयल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है।
याचिका में दोनों कक्षाओं की बायोलॉजी की किताबों में गलतियां भी संलग्न की गई हैं। याचिका में कहा गया है कि उन्होंने दोनों किताबों का गौर से अध्ययन कर इसकी जानकारी 6 सितंबर 2013 को एनसीईआरटी के नोटिस में ला दी थी, लेकिन बावजूद इसके देशभर के एनसीईआरटी से मान्यता प्राप्त स्कूलों में इन किताबों को पढ़ाया जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि पहली शिकायत के बाद उन्होंने 14नवंबर 2013 को रिप्रेजेंटेशन दी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
याचिका में समाचार पत्रों की वो प्रतियां भी संलग्न की गई हैं, जिनमें किताबों की कुछ त्रुटियों को उठाया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एनसीईआरटी को छह महीने पहले इन गलतियों से अवगत करवा दिया था, फिर भी काउंसिल तीन महीने का और समय मांग रही है।