चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग
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चंडीगढ़ की हरियाली कम होती जा रही है। प्रशासन इसे बनाए रखने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। इसलिए अब लोग आगे आए हैं। इस मुद्दे पर सेक्टर-37 सी के महाजन भवन में शहर के कई प्रतिष्ठित, पर्यावरण सरंक्षक और समाजसेवी लोग रविवार को इकट्ठे हुए। बैठक में निर्णय लिया कि जल्द ही सेक्टर वाइज सफाई और हरियाली को बचाने के लिए अभियान छेड़ा जाएगा। किसी एक सेक्टर को सफाई के मामले में मॉडल एरिया बनाया जाएगा।
हरियाली और पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों की भागीदारी बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। बैठक में कहा कि पेवर ब्लॉक लगाने से हरियाली कम हो रही है। जिस कारण पानी का ग्राउंड लेवल गिर रहा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि जल्द ही चंडीगढ़ फर्स्ट के नाम से एक संगठन का भी गठन किया जाएगा। जिसमें सिर्फ चंडीगढ़ को बचाने की ही बात होगी। अभी सिर्फ संगठन का नाम चंडीगढ़ फर्स्ट तय हुआ है। बैठक में एनके झिगंन, फॉसवेक के पूर्व चेयरमैन पीसी सांघी, पूर्व मनोनीत पार्षद डॉ. एपी सांवरिया और पर्यावरण प्रेमी राहुल महाजन ने भी भाग लिया।
पर्यावरण बचाने की बात नहीं होती
बैठक में फॉसवेक के पूर्व चेयरमैन पीसी सांघी का कहना है कि शहर में हरियाणा, पंजाब और हिमाचल से अधिकारी तीन साल के लिए आते हैं लेकिन चंडीगढ़ के मूल स्वरूप को बचाने की बात कोई अधिकारी नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के स्थानीय निवासियों को शहर बचाने के लिए एकजुट होना चाहिए।
...तो दिल्ली-मुंबई जैसा होगा हाल
बैठक में पर्यावरण प्रेमी एनके झिगन ने कहा कि अगर जल्द ही हरियाली को बचाने के लिए कदम न उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं जब शहर का हाल दिल्ली और मुंबई की तरह हो जाए। उनका कहना है कि प्रदूषण रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाकर अभी की हरियाली बचाने की जरूरत है।
पेड़ों का क्षेत्रफल गिर रहा है
पर्यावरण मंत्रालय की भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बताया गया है कि चंडीगढ़ में पेड़ों का क्षेत्रफल पिछले दो वर्षों में गिरा है। 2011 में आई रिपोर्ट के मुताबिक शहर पूरे देश में दूसरे नंबर पर था जो कि अब चौथे नंबर पर आ गया है।