ओम प्रकाश चौटाला, भूपेंद्र सिंह हुड्डा
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हरियाणा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए प्रवर्तन निदेशालय ईडी की अचानक बढ़ी सक्रियता ने संकट खड़ा कर दिया है। राज्य में दस साल मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा अन्य केसों में भी जांच के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में ईडी की बुधवार को एक बार फिर चार घंटे की पूछताछ से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। सूबे की सियासत में अहम रोल रखने वाले ओम प्रकाश चौटाला अभी अपनी रिहाई की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन उससे पूर्व ईडी की कार्रवाई से उन्हें झटका लगा है।
चौटाला ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी उम्र और बीमारी को आधार बना कर रिहाई की अपील की थी। इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित है। फैसला आने से पहले ही ईडी की इस कार्रवाई ने चौटाला को हैरत में डाल दिया है। हरियाणा में नई सरकार के गठन के बाद यह ईडी की पहली बड़ी कार्रवाई है। चौटाला परिवार की सिरसा से लेकर पंचकूला तक की संपत्तियां अटैच की गई हैं।
पिछले पांच साल में कई जांचों में उलझे हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पिछले पांच साल से कई जांचों में उलझे हुए हैं। मानेसर भूमि घोटाले सहित एजेएल और अन्य कई जमीन संबंधी मामलों में हुड्डा के खिलाफ विभिन्न जांच ऐजेंसियां जांच कर रही हैं। इसके अलावा वाड्रा डीएलएफ डील में भी ढींगरा आयोग अपनी जांच पूरी कर चुका है। यह बात अलग है कि यह रिपोर्ट आज तक जनता के सामने उजागर नहीं हो सकी।
चौटाला परिवार की सत्ता में भागीदारी
पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के छोटे भाई रणजीत सिंह वर्तमान हरियाणा सरकार में बिजली मंत्री हैं। जबकि पौत्र दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री हैं। पिछले 15 साल से सिर्फ ओम प्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अभय चौटाला से सत्ता दूर रही है। 15 साल बाद दुष्यंत भाजपा के बहुमत से दूर रहने पर गठबंधन सरकार में सत्ता में भागीदारी पाने में सफल हुए हैं।