चंडीगढ़ के खुड्डा अलीशेर में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने का खेल चल रहा है। शुरू में घर की चौखट बनाने से अतिक्रमण का कार्य शुरू होता है, जो धीरे धीरे बढ़ता जाता है और देखते ही देखते घर की चारदीवारी बढ़ा दी जाती है। यह सब कुछ रात के अंधेरे में होता है। हैरानी की बात है कि अवैध निर्माण की शिकायत के बात कार्रवाई नहीं हो रही है। इसकी वजह से खुड्डा अलीशेर की चौड़ी सड़क गली बनकर रह गई है।
शहर की समाज सेवी संस्था समस्या समाधान टीम ने सबसे पहले 14 सितंबर को नगर निगम को शिकायत की थी। बताया कि गांव खुड्डा अलीशेर समेत शहर के 13 गांव को कुछ साल पहले चंडीगढ़ नगर निगम में शामिल किया गया और अब इन गांव में गलियों और सड़कों को पक्का करने का काम चल रहा है। कई वर्षों तक कोई खास नजर नहीं होने की वजह से खुड्डा अलीशेर समेत विभिन्न गांवों में सरकारी गलियों और सड़कों पर अवैध निर्माण करके अतिक्रमण कर लिया गया है इसलिए गलियों और सड़कों को पक्का करने से पहले अवैध अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए।
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शिकायत में बताया गया कि गांव खुड्डा अलीशेर में फिरनी सड़क पर टिब्बी साहिब गुरुद्वारा के पास कुछ लोगों ने अपने घरों की सीमा को बढ़ाकर सरकारी फिरनी सड़क पर ही निर्माण किया हुआ है। शिकायत के साथ निर्माण की फोटो भी भेजी गई। बताया कि यह अवैध निर्माण अभी भी चल रहा है। इस वजह से सड़क की चौड़ाई तय मानक से घट गई। इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत के बाद भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण जारी
नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के बाद समस्या समाधान टीम के दिनेश कुमार ने 20 सितंबर को केंद्रीय माई ग्रीवेंस पोर्टल पर भी शिकायत GOVCC/E/2023/0000549 की। बताया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण अभी भी जारी है। कार्रवाई नहीं होने की वजह से लोगों के हौसले बुलंद हो गए हैं और धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। यही नहीं, कई लोग अतिक्रमण के बाद भी अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करते हैं। पहले अतिक्रमण की वजह सड़क की चौड़ाई कम हुई और फिर वाहन खड़ी करने के बाद लोगों के आने-जाने के लिए काफी थोड़ी जगह बच जाती है। कई सड़कें गलियां बन कर रह गई हैं। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच के बाद इस पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामला संज्ञान में आया है। शिकायत में अगर निर्माण सरकारी संपत्ति पर पाया जाता है तो उसे तोड़ने की कार्यवाही की जाएगी।
- आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम