महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों ने फिर बजाया आंदोलन का बिगुल
तीनों एसोसिएशन की बैठक में लिया निर्णय, आठ जनवरी को पंचकूला निदेशालय के बाहर करेंगे प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मियों एवं अधिकारियों ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। रविवार को हुई बैठक में सर्व सम्मति से आठ जनवरी को विभाग के पंचकूला निदेशालय पर धरना एवं प्रदर्शन का निर्णय लिया गया। इसमें आईसीडीएस सुपरवाइजर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा, मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन हरियाणा एवं आईसीडीएस आफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा से जुड़े कर्मचारी एवं अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने एलान किया अगर सरकार ने मांगें नहीं मानी तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। मुख्यालय पर किए जाने वाले प्रदर्शन से पहले इसकी तैयारियों को लेकर जोनल स्तरीय व जिला स्तरीय बैठकें की जाएंगी। आईसीडीएस आफिसर्स वेल्फेयर एसोसिएशन की राज्य प्रधान सबिता, आईसी डीएस सुपरवाइजर्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रधान सुशीला सिहाग एवं मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन डब्ल्यूसीडी हरियाणा के राज्य प्रधान प्रवीण मोर ने कहा कि एसोसिएशनों की तरफ से संयुक्त मांग पत्र विभाग को भेजा जा चुका है, लेकिन विभाग व सरकार द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उल्टा अधिकारियों को बेवजह से निलंबित किया जा रहा है। तीनों एसोसिएशनों ने जिला कार्यक्रम अधिकारी जींद को तुरंत बहाल करने की मांग की है।
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अधिकारियों के छह-छह खंडों का चार्ज, सिरसा विकास अधिकारी के पास 9 चार्ज
प्रधान सबिता मलिक ने कहा कि एक एक सुपरवाइजर के पास पांच-पांच सर्कलों और एक महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारियों के पास छः छः खंडों का कार्य आ जाता है। सिरसा जिले में एक बाल विकास परियोजना अधिकारी के पास नौ चार्ज हैं। इसी तरह सहायकों को भी दो या तीन खंडों का कार्य करना पड़ रहा है। पलवल में 45 सुपरवाइजरों के पदों पर केवल 8, नूंह में 45 पदों पर 15 व सिरसा में 54 पदों के विरुद्ध केवल 20 सुपरवाइजर काम कर रही हैं। सिरसा व पलवल में लंबे समय से केवल एक एक महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी काम कर रही है, जिनके पास सभी खंडों का चार्ज है। नूंह जिले के पुन्हाना व नगीना खंड में एक भी सुपरवाइजर नहीं है।