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Chandigarh News: लोकसभा चुनावों में ओपीएस को फिर मुद्दा बनाने में जुटे कर्मचारी संगठन

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समिति की ओर से ब्लॉक स्तर पर किए जा रहे कर्मचारी सम्मेलन
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गांव, वार्ड स्तर पर चलाई जा रही वोट फॉर ओपीएस की मुहिम
चंडीगढ़। हरियाणा के कर्मचारी और अधिकारी लोकसभा चुनाव में ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) को मुद्दा बनाने में जुट गए हैं। पिछले कई सालों से पेंशन बहाली संघर्ष समिति के बैनर तले लगातार ओपीएस बहाली के लिए कर्मचारी और अधिकारी आंदोलन करते रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद अभी तक ओपीएस मुद्दे का कोई समाधान सरकार नहीं निकाल पाई। अब कर्मचारी संगठन चुनावी शोर के बीच इस मुद्दे को उठा रहे हैं। मुद्दे को लेकर कर्मचारियों को एकजुट करने के लिए समिति की ओर से ब्लाक स्तर पर सम्मेलन किए जा रहे हैं और गांव-गांव जाकर वोट फाॅर ओपीएस की मुहिम को रंग देने की कोशिश की जा रही हैं।

2.90 लाख सरकारी कर्मचारी हैं प्रदेश में
हरियाणा में 2.90 लाख सरकारी कर्मचारी हैं और लगभग 40 हजार हरियाणा निवासी कर्मचारी ऐसे है जो केंद्रीय विभागों और अर्धसैनिक बलों में नियुक्त हैं। इन पर नई पेंशन योजना एनपीएस लागू की गई। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि एक कर्मचारी के परिवार में औसतन पांच मतदाताओं के हिसाब से कुल वोटरों की संख्या 15 लाख से ज्यादा बनती है। इस प्रकार प्रत्येक लोकसभा के अनुसार कर्मचारियों का सवा लाख से ज्यादा वोट कर्मचारियों के है जो लोकसभा चुनाव में हार-जीत के परिणाम को तय करने के किए काफी है।
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2023-24 में संघर्ष समिति ने किए बड़े आंदोलन
2023 में पूरा साल ओपीएस आंदोलन चलता रहा। पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने 19 फरवरी 2023 को पंचकूला में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया। 16 अप्रैल को जिला स्तरीय आक्रोश प्रदर्शन व एक अक्तूबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में पेंशन शंखनाद महारैली की गई। इसके बाद 11 फरवरी 2024 को जींद के एकलव्य स्टेडियम में संघर्ष समिति की ओर से ओपीएस संकल्प महारैली कर वोट फॉर ओपीएस की शपथ ली गई। समिति की नांगल चौधरी से शुरू हुई साइकिल यात्रा सभी जिलों से होते हुए 23 जून को पंचकूला में पहुंची, जहां राज्यपाल के नाम ज्ञापन दे यात्रा का समापन किया गया। 20 फरवरी को मुख्यमंत्री की ओर से संघर्ष समिति से वार्ता के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया। इसके साथ ही तीन मार्च को केवल एक बार संघर्ष समिति के डेलिगेशन की मीटिंग हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
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लगातार धरने प्रदर्शन, रैलियां करने के बावजूद भी सरकार की ओर से ओपीएस बहाल नहीं किया गया। 11 फरवरी को जींद के एकलव्य स्टेडियम में महारैली कर ओपीएस नहीं तो वोट नहीं कि शपथ ले चुके हैं। ऐसे में अब समिति के सदस्य गांवों और ब्लाॅक स्तर पर वोट फाॅर ओपीएस अभियान चला रहे हैं।
- विजेन्द्र धारीवाल, प्रदेश अध्यक्ष, पेंशन बहाली संघर्ष समिति
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