कुप्रबंधन के कारण पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीआरटीसी) के मुलाजिमों को समय से वेतन और पेंशन न मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोकसभा चुनाव में यह मुद्सा सियासी पार्टियों की दिक्कत बढ़ा सकता है।
दरअसल, पूर्व कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने अप्रैल 2021 में पंजाब में महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर की सुविधा शुरू की थी। कुछ महीने सब ठीक चला, लेकिन इसके बाद महिलाओं के मुफ्त बस सफर की बनती अदायगी के भुगतान में अकसर कई-कई महीनों की देरी होने लगी। यह सिलसिला पंजाब की मौजूदा भगवंत मान सरकार के राज में भी जारी है। हालात यह हैं कि इस समय सरकार की तरफ मुफ्त बस सफर का 400 करोड़ का बकाया पेंडिंग है। पीआरटीसी की ओर से कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी है, जिसके चलते कॉर्पोरेशन को वेतन और पेंशन देना भी मुश्किल हो रहा है। तकरीबन हर महीने मुलाजिमों को 10 तारीख के बाद ही जाकर वेतन मिल पाता है।
पीआरटीसी को वर्तमान में बसों से रोजाना औसतन 2.20 करोड़ की आय हो रही है, लेकिन इसमें से 1.10 करोड़ महिलाओं के मुफ्त बस सफर का बन जाता है। इस हिसाब से कॉर्पोरेशन हर महीने महिलाओं को करीब 33 करोड़ का मुफ्त सफर करा देता है। जिस समय यह स्कीम शुरू हुई थी, उस समय हर महीने का बनता बकाया साथ के साथ देने का वादा हुआ था, लेकिन स्कीम शुरू होने के बाद से ही भुगतान में देरी होने लगी।
स्कीम शुरू करना गलत नहीं, सरकारी ट्रांसपोर्ट चलाने की तरफ नहीं है ध्यान: धालीवाल
पीआरटीसी वर्कर्स एक्शन कमेटी के कन्वीनर निर्मल सिंह धालीवाल का कहना है कि महिलाओं के लिए कोई स्कीम शुरू करना गलत नहीं है, लेकिन असल समस्या यह है कि सरकारों का ध्यान सरकारी ट्रांसपोर्ट चलाने की तरफ नहीं है। चाहे वह पूर्व की कांग्रेस सरकार हो या फिर मौजूदा आप सरकार किसी ने भी कभी समय से भुगतान नहीं किया। यह सरकारों के कुप्रबंधन व बदनीयती को दर्शाता है, जिसका खामियाजा मुलाजिम वर्ग को उठाना पड़ रहा है। हर महीने का यही रोना है मुलाजिमों को न तो समय से तनख्वाह और न पेंशन मिल पा रही है। तकरीबन हर महीने सड़कों पर उतर कर धरने व
प्रदर्शन करके तनख्वाह लेनी पड़ती है। जब मुलाजिम धरने देते हैं, तो सरकार तनख्वाह देने को कुछ फंड जारी कर देती है। एक साथ सारा बैकलॉग क्लीयर क्यों नहीं किया जा रहा है।
पैसों की तंगी से बसों का मरम्मत कार्य प्रभावित
पीआरटीसी की बेड़े में इस समय तकरीबन 1200 बसें हैं। इनका रोजाना का डीजल का खर्चा करीब 85 लाख रुपये है। ऊपर से टोल प्लाजों व रोड टैक्स का खर्चा अलग है। ऐसे में सरकार से बनती अदायगी समय से न मिल पाने के कारण बसों की मरम्मत का काम भी प्रभावित हो रहा है। कारपोरेशन बसों की मरम्मत के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स व टायर तक नहीं खरीद पाता है। इससे बसों की मरम्मत का काम भी प्रभावित होता है। यही नहीं पीआरटीसी की तरफ मुलाजिमों के करीब 30 करोड़ के बकाया भी पेंडिंग हैं। इनमें डीए, मेडिकल, ओवरटाइम के बकाया शामिल हैं।
सात तक तनख्वाह न मिलीं, तो होगा आंदोलन: ठेका मुलाजिम
पंजाब रोडवेज, पनबस, पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल, प्रदेश वरिष्ठ उप प्रधान हरकेश कुमार विक्की ने बैठक करके सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर सात मई तक तनख्वाह खाते में न पड़ी, तो फिर 8 मई को गेट रैलियां व डिपो बैठकें की जाएंगी। इसके बाद 10 मई को दो घंटे के लिए पूरे पंजाब में बस सेवा बंद की जाएगी। 15 मई से तनख्वाह नहीं काम नहीं के नारे के तहत अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल की जाएगी।