चंडीगढ़। जिला अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी इमर्जिंग इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर गुरप्रीत सिंह सिद्धू को अदालत में पेश न होने के मामले में दोषी ठहराया है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 174ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि अदालत ने उन्हें अतिरिक्त कारावास देने के बजाय अब तक जेल में बिताए समय को ही सजा मानते हुए रिहाई का आदेश नहीं दिया।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी पिछले करीब एक वर्ष से न्यायिक हिरासत में है और यह अवधि उसके लिए पर्याप्त दंड के समान है। ऐसे में इस प्रकरण में अलग से सजा सुनाने की आवश्यकता नहीं है।
सिद्धू को पिछले वर्ष उपभोक्ता आयोग में लंबित मामलों के दौरान अदालत में पेश न होने पर भगोड़ा घोषित किया था। उनके खिलाफ आयोग में दर्जनों शिकायतें लंबित हैं। आयोग की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने अप्रैल 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया था। लंबे समय तक फरार रहने के चलते पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 174ए के तहत एफआईआर दर्ज की थी। यह धारा उस स्थिति में लागू होती है जब कोई व्यक्ति अदालत द्वारा घोषित किए जाने के बावजूद पेश नहीं होता।
अन्य मामलों में जारी रहेगी न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने संबंधित अदालत में चालान पेश किया जिसके बाद सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी करार दिया गया। हालांकि, इस मामले में सजा पूरी माने जाने के बावजूद सिद्धू को तत्काल राहत नहीं मिलेगी। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ 10 से अधिक आपराधिक मामले, कई सिविल केस और दर्जनों उपभोक्ता शिकायतें अभी भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। ऐसे में अन्य मामलों के चलते वह फिलहाल जेल में ही रहेंगे।