अब रेल पटरियों और सड़कों पर हाथियों की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी। चंडीगढ़ के सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अत्याधुनिक प्रणाली विकसित की है, जो हाथियों की गतिविधि का पहले ही पता लगाकर रेलवे और वन विभाग को रियल-टाइम अलर्ट भेज देती है। इस अनोखी तकनीक का नाम है एलीसिस अलर्ट और थर्मअलर्ट सिस्टम, जो भूकंपीय और थर्मल तकनीकों के संयोजन से काम करती है।
सीएसआईओ के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर इंटेलिजेंट सेंसर एंड सिस्टम की वैज्ञानिक और इस प्रोजेक्ट की प्रमुख डॉ. अपर्णा ने बताया कि भारत में एशियाई हाथियों की आबादी दुनिया की कुल संख्या का 50 प्रतिशत से अधिक है। लेकिन तेज शहरीकरण, राजमार्गों और रेलवे नेटवर्क के विस्तार से उनके आवास क्षेत्र लगातार सिमट रहे हैं।
देश के लगभग 40 राष्ट्रीय राजमार्ग और 21 रेलवे ट्रैक करीब 88 हाथी गलियारों से होकर गुजरते हैं। इस कारण टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए सीएसआईओ ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से यह प्रणाली तैयार की है।
रियल-टाइम अलर्ट से बचेंगी कई जिंदगियां
डॉ. अपर्णा के अनुसार, एलीसिस अलर्ट सिस्टम में लगे भूकंपीय सेंसर जमीन की सूक्ष्म हलचलों को मापकर हाथियों की गतिविधि का सटीक अनुमान लगाते हैं। जैसे ही किसी हाथी की उपस्थिति दर्ज होती है, यह सिस्टम रेलवे और वन विभाग को तुरंत अलर्ट भेज देता है, जिससे ट्रेनें समय रहते धीमी या रोकी जा सकती हैं।
वहीं, थर्मअलर्ट सिस्टम थर्मल इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है, जो दिन-रात और हर मौसम में हाथियों, मनुष्यों और वाहनों की गतिविधियों को ट्रैक करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूर्ण अंधेरे में भी सटीक रूप से काम करता है।
सफल हो चुका है पायलट प्रोजेक्ट
इस प्रणाली का सफल पायलट प्रोजेक्ट उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में चलाया जा चुका है। इसका डिजाइन इतना मजबूत और कैमुफ्लाज्ड (प्राकृतिक वातावरण में घुलने वाला) है कि यह वन्यजीवों को परेशान किए बिना काम करता है।
डॉ. अपर्णा ने बताया कि यह तकनीक भविष्य में न केवल हाथियों की, बल्कि अन्य जंगली जानवरों और कृषि भूमि की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा सकती है। इससे न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, बल्कि जैव विविधता की रक्षा की दिशा में यह भारत की एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि साबित होगी।