हरियाणा के पानीपत थर्मल प्लांट का वजूद संकट में है। प्लांट की यूनिटें धीरे-धीरे बंद होती जा रही है और बिजली का उत्पादन भी कम हो रहा है। प्लांट के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। वर्ष 2019 में तो प्लांट की कुल आठ यूनिटें में से दो और यूनिटें पूरी तरह से ठप रही। जिस वजह से इन यूनिटों का काफी स्टाफ बिना काम खाली बैठा रहा। अब इस थर्मल प्लांट की छह यूनिटें ठप हो चुकी है।
ये मामला हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की वार्षिक राजस्व जरूरत (एआरआर) को लेकर हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएन) और हरियाणा बिजली उत्पादन निगम (एचपीजीसीएल) की पब्लिक हीयरिंग बैठक में भी उठाया गया। बैठक की अध्यक्षता एचईआरसी के चेयरमैन दीपेंद्र सिंह ढेसी ने की, जबकि इस दौरान आयोग के सदस्य प्राविंद्रा सिंह चौहान, सदस्य नरेश सरदाना समेत बिजली विभाग के कई आला अफसर भी मौजूद रहे।
बताते चलें कि हरियाणा में एचपीजीसीएल (हरियाणा पॉवर जेनरेशन कारपोरेशन लिमिटेड) के अंतर्गत तीन पॉवर प्लांट है। इनमें यमुनानगर पॉवर प्लांट, जहां 300-300 मैगावाट की दो यूनिटें, खेदड़ पॉवर प्लांट, जहां 600-600 मैगावाट की दो यूनिटें व तीसरा थर्मल पॉवर प्लांट शामिल हैं। जहां 110-110 मैगावाट की चार यूनिटें, 210-210 मैगावाट की दो यूनिटें व 250-250 मैगावाट की दो यूनिटें हैं। मगर अब पानीपत थर्मल प्लांट की दो और यूनिटें ठप हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार थर्मल प्लांट की चार यूनिटें पहले से ही बंद हैं, जबकि यूनिट नंबर पांच और छह जो कि 210 मैगावाट की हैं, वे भी वर्ष 2019 में पूरा साल ही ठप रही। इनमें से भी यूनिट नंबर पांच को ठप घोषित हो चुकी है। जबकि यूनिट नंबर छह में भी वर्ष 2019 बिजली उत्पादन नहीं हुआ। यानी कुल मिलाकर अब पानीपत थर्मल प्लांट की कुल आठ यूनिटों में से छह यूनिटें अब पूरी तरह से बंद हो चुकी है।
हालातों पर आयोग भी चिंतित
पानीपत थर्मल प्लांट के मौजूदा हालातों पर हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (एचईआरसी) भी चिंतित है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में एचईआरसी के चेयरमैन डीएस ढेसी ने पानीपत थर्मल प्लांट की यूनिटों की जानकारी हासिल की। इस दौरान चेयरमैन को बताया गया कि वर्ष 2019 में प्लांट की यूनिट नंबर सात 3387 घंटे और यूनिट नंबर आठ 4218 घंटे ही चली।
हरियाणा के थर्मल प्लांटों के प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) के बारे में भी एचपीजीसीएल के अधिकारियों ने जानकारी दी। एचपीजीसीएल के सीएफओ बीबी गुप्ता ने पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए एचपीजीसीएल का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इस पर आयोग के चेयरमैन ने एचपीजीसीएल के अफसरों को सलाह दी कि वेअन्य राज्यों में थर्मल प्लांटों की स्टडी करके यह तय करें कि प्लांट भविष्य में कैसे पोषित हो सकता है।
अपेक्षाकृत महंगी बिजली, कम खरीदता है डिसकॉम
हरियाणा में लगभग 41 फीसद बिजली प्राइवेट, 27 प्रतिशत एचपीजीसीएल से, करीब 7 फीसद बीबीएमबी और 25 प्रतिशत केंद्रीय पोषित पॉवर प्लांटों से खरीदी जाती है। सूत्रों ने बताया कि एचपीजीसीएल की बिजली खरीद का रेट प्राइवेट कंपनियों के अपेक्षाकृत थोड़ा महंगा है, इसलिए हरियाणा में डिसकॉम (उतर एवं दक्षिण बिजली वितरण निगम) एचपीजीसीएल के पॉवर प्लांटों से बिजली कम खरीदता है।
यही वजह है कि पानीपत थर्मल के अधिकतर प्लांटों में बिजली उत्पादन ठप हो चुका है और ये बंद हो चुके हैं। लेकिन आयोग ने एचपीजीसीएल के अफसराें से अपील की है कि वे देखें कि किस तरह इन प्लांटों को कायम रखते हुए यहां बिजली उत्पादन जारी रखा जा सकता है।