गर्मी आते ही बिजली की समस्या शुरू हो गई है। बिजली के कट लगने लगे हैं। अगले महीने पैडी सीजन शुरू होने की वजह से समस्या के और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पंजाब के बिजली सरप्लस होने के सरकारी दावों की हवा निकलती दिखाई पड़ रही है।
हालांकि, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल का कहना है कि बिजली कट उपलब्धता की कमी के कारण नहीं बल्कि अन्य वजहों से लग रहे हैं। प्रस्तुत है प्रदेश में बिजली की उपलब्धता, मांग व पैडी सीजन के लिए किए गए प्रबंधों पर आधारित रिपोर्ट :
पैडी सीजन के लिए तैयारी
पैडी सीजन (जून में धान की बुआई का समय) के दौरान बिजली की मांग 1500 एलयू (लाख यूनिट) तक पहुंच जाती है। पिछले साल यह 1200 एलयू रही थी। पीएसपीसीएल ने इस बार 1400 एलयू के हिसाब से तैयारी की है।
प्रदेश को अपने स्त्रोतों से उपलब्धता 1650 एलयू है, फिर भी कोयले की कमी, यूनिटों में तकनीकी खराबी, हाइडल प्रोजेक्टों में पानी की कमी से उत्पादन कम होने आदि आशंकाओं को ध्यान में रखकर खरीद के प्रबंध भी कर लिए हैं।
महंगी बिजली से उद्यमियों में रोष
राज्य सरकार की ओर से बिजली पर पांच फीसदी अतिरिक्त फीस लगाने से उद्योग जगत में रोष है। उद्यमियों का दावा है कि सूबे में अन्य राज्यों के मुकाबले बिजली सबसे महंगी हो गई है। साथ ही पेट्रोल और डीजल पर भी रिकार्ड तोड़ टैक्स लगाकर उद्योग जगत को टैक्सों के बोझ तले पीसने का इंतजाम कर लिया गया है।
वहीं सूबे में बिजली सरप्लस होने के दावों के बीच 15 जून से शुरू हो रहे धान सीजन में आपूर्ति पूरी करने के लिए तकरीबन चार हजार मेगावाट बिजली खरीदने का इंतजाम किया जा रहा है। परेशान उद्यमी एक मंच पर इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं फर्नेस इंडस्ट्री अन्य राज्यों मे विकल्प तलाशने लगी है।
अपैक्स चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के प्रधान पीडी शर्मा ने कहा कि महंगी दरों के अलावा बिजली पर 13 फीसदी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी लगाई जा रही है। अब सरकार ने पांच फीसदी अतिरिक्त फीस लगा दी है। साथ ही लोग बिजली पर दस पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से चुंगी की अदायगी भी कर रहे हैं। चैंबर ने मांग की है कि इस बोझ को तुरंत हटाया जाए।
नार्दर्न इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के प्रधान केके गर्ग का कहना है कि बड़ी इकाईयों को बिजली 7.56 रुपये प्रति यूनिट पड़ रही है। फर्नेस को एक टन लोहा तैयार करने पर छह हजार रुपये बिजली खर्च आ रहा है। इन हालात में इंडस्ट्री चलाना संभव नहीं है। इसलिए एसोसिएशन अन्य राज्यों में विकल्प तलाश कर रही है।
कोयले की कमी से बिजली संकट के आसार
पैडी सीजन में कोयले की कमी से बिजली संकट गहराने के संकेत हैं। इसे को टालने को पावरकाम अपने तीनों प्लाटों के इक्का-दुक्का यूनिट ही इन दिनों चला रही है। बिजली की मांग चरम पर पहुंचने से कोयले की कमी की आशंका है। पावरकाम के प्लांटों को इस समय करीब चालीस फीसदी कोयले की सप्लाई हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गैरकानूनी कोल ब्लाक आवंटन रद करने के कारण पावरकाम के थर्मल प्लांटों को 60 फीसदी कोयले की सप्लाई रुकी है। हालांकि पावरकाम को नए कोल ब्लाकों का आवंटन हो गया है, लेकिन यह कोल ब्लाक अभी तक चालू नहीं हो सके हैं।
इससे फिलहाल पावरकाम को 40 फीसदी कोयले की सप्लाई पश्चिमी ब्लाक की कोल ब्लाकों से हो रही है। इस समय रोपड़ की दो, बठिंडा व लहरां मोहब्बत का एक-एक यूनिट चल रही है। इनमें 25-25 दिनों का कोयला बचा है। 60 फीसदी कोयले की कमी से बिजली संकट गहरा सकता है।
गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग 6600 मेगावाट पहुंची
शनिवार को प्रदेश में बिजली की डिमांड 6600 मेगावाट तक पहुंच गई, जो अभी तक की सबसे अधिक डिमांड रही। हालांकि उपलब्धता पूरी रही। क्योंकि भले ही पावरकाम अपने प्लांटों के यूनिट कोयला बचाने को कम चला रहा है। लेकिन राजपुरा प्लांट के दोनों यूनिट चल रहे हैं। उधर रणजीत डैम, बीबीएमबी और पौंग में पानी का स्तर ठीक होने से बिजली सप्लाई बढ़िया हो रही है। इसका पावरकाम को फिलहाल फायदा हो रहा है।
बैंकिंग में रोजाना 80 लाख यूनिट मिलेगी
पावरकाम ने सर्दी के सीजन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जेएंडके और चेन्नई को बैंकिंग सिस्टम के तहत 8000 लाख यूनिट दी है। अब यही बिजली पावरकाम पैडी सीजन के लिए इन राज्यों से वापस लेगा। इसके तहत रोजाना 80 लाख यूनिट बिजली सूबे को मिलेगी।
4000 मेगावाट खरीद के समझौते
पावरकाम ने पैडी सीजन के लिए पावर ट्रेडिंग कारपोरेशन आफ इंडिया के जरिये 4000 मेगावाट बिजली खरीद के समझौते किए हैं। इन समझौतों के तहत जून से अगले तीन महीनों के लिए पावरकाम को बिजली मिलेगी। जून में 1400 मेगावाट, जुलाई में 1600 मेगावाट और अगस्त में 950 मेगावाट बिजली प्रदेश को मिलेगी। यह बिजली पावरकाम को साढ़े तीन रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिलेगी।