बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ चंडीगढ़ कांग्रेस ने सेक्टर-22 में सिविल अस्पताल के पास भूख हड़ताल शुरू कर दी। बुधवार को हड़ताल का पहला दिन रहा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की समेत कई पार्षद हड़ताल पर बैठे। उन्होंने स्थानीय भाजपा नेताओं को चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी है।
लक्की ने बिजली विभाग के निजीकरण की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ का बिजली विभाग फायदे में है लेकिन उसे बेचा जा रहा है। एक बार बिजली विभाग का निजीकरण हो गया तो चंडीगढ़ में बिजली के दाम, जो अभी देश में सबसे सस्ते हैं, वह देश में सबसे महंगी हो जाएगी। यह केंद्र की साजिश है, जिसके तहत मुनाफा कमाने वाले विभागों को कौड़ियों के दाम बेचा जा रहा है। केंद्र सरकार देश की संपत्तियां अडानी जैसे व्यापारियों को बेच रही है। अब चंडीगढ़ के लोगों पर एक और अडानी को थोप दिया है, जिसे प्रशासन, बिजली विभाग की सारी संपत्तियां सौंप रहा है। उन्होंने बताया कि शहरवासियों और बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए पार्टी के पांच कार्यकर्ता अगले सात दिनों तक क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
पहले दिन इन नेताओं ने की भूख हड़ताल :
पहले दिन एचएस लक्की के नेतृत्व में पार्षद गुरप्रीत गाबी, जसबीर बंटी, तरुणा मेहता और पूर्व युवा विंग के अध्यक्ष मनोज लुबाना ने दिन भर भूख हड़ताल की। वीरवार को कांग्रेस नेताओं की दूसरी एक टीम इसी स्थान पर दूसरे दिन की भूख हड़ताल पर बैठेगी। लक्की ने घोषणा की है कि चंडीगढ़ कांग्रेस तब तक शहर के नागरिकों के लिए सड़कों पर उतर कर उनके अधिकारों के लिए लड़ती रहेगी, जब तक प्रशासन इस तरह के जनविरोधी रवैये और फैसलों को वापस नहीं लेता।