चंडीगढ़ प्रशासन का बिजली विभाग शहर के 2.67 हजार घरों के वर्तमान मीटर को स्मार्ट मीटर में बदलने की तैयारी कर रहा है।
बिजली विभाग ने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय को भेज दिया है। इस पर करीब 160 करोड़ का खर्च आएगा। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र से मंजूरी मिलते ही टेंडरिंग व अन्य प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी।
रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत केंद्र सरकार ने सभी राज्य व केंद्रों को यह निर्देश जारी किए हैं कि वह वर्तमान पुराने बिजली के मीटर को स्मार्ट मीटर में बदले। चंडीगढ़ में कुछ साल पहले पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया।
इस पूरी परियोजना को लेकर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई। इस पर करीब 160 करोड़ का खर्च आएगा। प्रशासन ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए एक इंटरनल कमेटी बनाई है, जिसने मंजूरी दी। प्रशासक ने भी डीपीआर की जानकारी ली और मंजूरी दी। इसके बाद शुक्रवार को विभाग ने विद्युत मंत्रालय को मंजूरी के लिए फाइल भेज दी है।
100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट को मंत्रालय ही करता है मंजूर
यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि अगर कोई भी प्रोजेक्ट, जिसकी लागत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है, उसे मंजूरी के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्रालय को भेजना अनिवार्य होता है। विभाग ने डीपीआर मंजूरी के लिए भेज दी है। अब मंत्रालय की कमेटी देखेगी और मंजूरी देने पर फैसला लेगी। मंजूरी मिलने के बाद ही टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू होगी और फिर मीटर लगाए जाएंगे। ओझा ने कहा कि स्मार्ट मीटर से लोगों को भी काफी लाभ मिलेगा।
अब तक लग चुके हैं 24240 बिजली के स्मार्ट मीटर
बिजली विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत सब डिवीजन नंबर-5 के अंदर 24240 स्मार्ट मीटर लगाए हैं। इसके अंदर जो सेक्टर और गांवों आते हैं, उनमें इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1, 2, सेक्टर-29, 31, 47, 48, राम दरबार, गांव फैदां, हल्लोमाजरा, बहलाना, रायपुर कलां, मक्खनमाजरा और दड़वा आदि गांव शामिल हैं। इसे एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नाम दिया गया है। यह प्रोजेक्ट कई साल चला और इस पर करीब 28 करोड़ खर्च हुए हैं।
खास होते हैं बिजली के स्मार्ट मीटर
- स्मार्ट मीटर, बिजली मीटरों से छेड़छाड़ को रोकते हैं।
- ये मीटर, लोड, वोल्टेज, आउटेज, पीक डिमांड, बिजली की खपत और बिजली लाइनों की ट्रिपिंग पर नजर रखते हैं।
- ये पारंपरिक मीटर से मिलते-जुलते होते हैं लेकिन डिजिटल डिवाइस होते हैं। ये, ऊर्जा खपत के आंकड़ों को मापते और रिकॉर्ड करते हैं।
- ये प्री-पेड मीटर होंगे, जिससे बिजली विभाग को खपत का पूरा पैसे मिलेगा
- लीकेज की जानकारी मिलेगी। साथ ही मैनुअल रीडिंग लेने की व्यवस्था खत्म हो जाएगी
आरडीएसएस में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर जोर
आरडीएसएस, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र में सुधार करना और इसे अधिक कुशल, भरोसेमंद और टिकाऊ बनाना है। यह योजना 2021 में शुरू की गई और इसका समय-सीमा 2025-26 तक है। इस योजना के कई मुख्य उद्देश्य हैं, जिनमें वितरण में सुधार, स्मार्ट प्रौद्योगिकी का उपयोग, सस्ती और निरंतर बिजली आपूर्ति है। इसमें स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर जोर दिया गया है, जिससे बिजली बिलिंग में पारदर्शिता और कुशलता आएगी। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर का सुधार, तकनीकी समाधान, बिजली चोरी में कमी भी आएगी।